आकाश में टूटते हुए तारों को देखना सबको पसंद होता है। इस अद्भुत नजारे को आज रात आप आकाश में जीभर कर निहार सकते हैं। दरअसल, पर्सिड्स उल्का बौछार 11 अगस्‍त की रात को अपने पूरे शबाब पर रहेगी। अगर आप सही जगह पर हैं और आकाश में सही जगह पर देख रहे हैं तो इस सितारों की बारिश का दीदार कर सकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस साल उल्‍का की यह बौछार बहुत खास होने जा रही है।

हर साल मध्‍य अगस्‍त के महीने में पर्सिड्स उल्का बौछार अपने चरम पहुंच जाती है। खगोलविदों का मानना है कि यह साल उल्‍का के बौछार को देखने के लिए सबसे बढ़‍िया होने जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि अगर आपने इसे मिस कर दिया तो पछताएंगे। उल्‍का के बौछार को देखने के लिए यह जरूरी है कि आप सही जगह पर हों और आसमान साफ हो। सबसे अच्‍छी बात यह है कि उल्‍का के बौछार को देखने के लिए किसी टेलिस्‍कोप आदि की जरूरत नहीं होगी।

कब देख सकेंगे सितारों की बारिश
विशेषज्ञों के मुताबिक बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक उल्‍का की बौछार अपने चरम पर रहेगी। वैसे अभी पूरे सप्‍ताह तक कम या ज्‍यादा उल्‍का की यह बौछार जारी रहेगी। उन्‍होंने कहा कि गुरुवार अल सुबह 4 से 5 बजे के बीच उल्‍का की यह बारिश सबसे ज्‍यादा रहेगी। हालांकि इसकी शुरुआत बुधवार को रात 10 बजे के आसपास शुरू हो जाएगी। इसे आकाश में पूर्वोत्‍तर इलाके में देखा जा सकता है। धरती के उत्‍तरी गोलार्द्ध में उल्‍का की बौछार को सबसे अच्‍छे तरीके से देखा जा सकता है। इसी गोलार्द्ध में भारत भी आता है। ऐसे में भारत में भी इसे अच्‍छे से देखा जा सकता है।

गत 14 जुलाई से पर्सिड्स उल्का बौछार (Perseid Meteor Shower) शुरू हुई थी और 24 अगस्त तक आसमान से उल्कापिंडों के छोटे-छोटे टुकड़े धरती के वायुमंडल में प्रवेश करेंगे। धूल, पत्थर और बर्फ से बने ये टुकड़े वायुमंडल से घर्षण के कारण आग के गोलों में बदल जाएंगे। ये टुकड़े इतने छोटे होंगे कि धरती पर गिरने से पहले ही हवा में जलकर खाक हो जाएंगे, लेकिन इनकी तेज रोशनी लोगों का ध्यान जरूर खींच लेगी।

Perseid क्यों है खास?
पर्सिड्स कोई ऐस्टरॉइड नहीं बल्कि Comet यानी धूमकेतु Swift Tuttle से निकले उल्कापिंड हैं। ये खास उल्कापिंड बेहद चमकीले फायर बॉल जैसे होते हैं। इसलिए इन्हें देखा जाना आसान है। इसके लिए रात के वक्त चांद की रोशनी में छत पर लेटकर आंखों को करीब आधे घंटे के लिए अंधेरे का आदी होने दें। आसपास की रोशनी से उल्कापिंड को देखना मुश्किल हो सकता है।