कोरोना के प्रकोप के चलते लोग अपने अपने घरों में कैद हैं। पूरी दुनिया में लॉकडाउन जारी है। भारत देश की  बात करें तो यहां 3 मई को लॉकडाउन खुलने वाला हैं लेकिन हालातों को देखते हुए लॉकडाउन को वापस से लागू करने पर विचार किया जा रहा है। लेकिन तालाबंदी में लोग अजीबोगरीब बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। लोग मानसिक बिमारियों के शिकार हो रहे हैं।


एक डॉक्टर के मुताबिक लोगों को घर ठीक से नींद नहीं आ रही है। कोरोना की लगातार खबरें देखने और सुनने से लोगों को नींद में ही कोरोना संक्रमण होने का खौफ आ रहा है। जिससे नींद पूरी नहीं हो पा रही है और वो चिड़चिड़े होते जा रहे हैं। डॉक्टरों के पास 30 प्रतिशत ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। पटना एम्स और आईजीआईएमएस के टेलामेडिसिन में हर दिन ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है।


लोगों को कोरोना से फोबिया हो रहा है। नकारात्मक विचार आ रहे हैं। जिससे लोगों को सुकून नहीं मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि घर में क्रिएटिव काम करने चाहिए जिससे बच्चों और बुजुर्गों में कोरोना के खौफ का बाहर निकले।  डॉक्टरों ने कहा कि बच्चों के लिए डर की स्थिति काफी घातक हो सकती है। ये बाद में फोबिया का रूप ले सकता है।