अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि पिछले हफ्ते एक महिला द्वारा उनके खिलाफ लगाया गया बलात्कार का आरोप ‘गलत और राजनीति से प्रेरित’ है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले के गुण-दोष पर फैसले के लिए उन्हें राष्ट्रीय महिला आयोग पर पूरा भरोसा है।

खांडू ने कल एक बयान में कहा, ‘‘मैं इस गलत आरोप से दुखी और चकित हूं। मैंने हमेशा ईमानदारी के साथ काम किया है। मेरे विचार से, ऐसे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और मेरे विरोधियों द्वारा बनाए गए हैं।’’ उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन लोगों ने अरूणाचल प्रदेश के राजनीतिक जीवन की ‘‘छवि खराब’’ करने के लिए ऐसी ‘‘गंदी चाल’’ का सहारा लिया है।


बता दें एक महिला ने राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दाखिल की है कि खांडू ने 2008 में उनके साथ दुष्कर्म किया था। यह शिकायत 15 फरवरी को दाखिल की गयी थी। महिला आयोग के संज्ञान में मामला आने के बाद शिकायत दर्ज की गई। महिला पश्चिम शियांग की रहने वाली है, इसने तीन लोगो पर गैंग रेप का इल्जाम गया है जिसमें पेमा खांडू का नाम शामिल है, जिसमें पीडि़ता नेशनल कमिशन फॉर वीमेन एक्ट की धारा 10 के तहत अपनी वकील के जरिये केस दर्ज करवाया है। पीडि़ता ने तवांग हाई स्कूल के टीचर फुर्पा लामा थुंपीन ताशी और दोरजी वांग्चू और खांडू पर आरोप लगाया है की इन्होने जुलाई 2008 में उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया था।


पीडि़ता का दावा है कि सीजीएम कोर्ट ने भी उसकी शिकायत खारिज कर दी। आरोप लगाने वाली महिला की वकील रश्मी भाटी ने बताया है कि मेरे मुवक्किल ने अरुणाचल प्रदेश के सीएम के खिलाफ  रेप का आरोप लगाया है। यह घटना साल 2008 की ही। उन्होंने संवाददाताओं को बताया था कि इस मामले में पीडि़त महिला ने पुलिस और अदालत में शिकायत की थी, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद दिल्ली में महिला आयोग से शिकायत की गई है।

पीडि़ता का कहना है की खांडू और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए

उसे साहस जुटाने में 7 साल का लंबा समय लगा हैए पीडि़ता का दावा है कि उसने

दो एफआईआर दर्ज करवाई थी। पहली दिसंबर 2015 दूसरी जनवरी 2017 दोनों एफआईआर

दर्ज करवाने ईटानगर पुलिस थाने पहुंची थी, लेकिन थाना प्रभारी ने एफआईआर

दर्ज करने से मना कर दिया यहां तक की पुलिस अधीक्षक ने भी उसकी उसकी कोई

सुनवाई नहीं की।