बिहार में जन अधिकार पार्टी (जेएपी) (Jan Adhikar Party) का अगले कुछ हफ्तों में कांग्रेस में विलय हो सकता है। पार्टी प्रमुख राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (pappu yadav) ने विलय से पहले सभी पहलुओं पर विचार करने के लिए 16 और 17 दिसंबर को बैठक बुलाई है। पार्टी के एक नेता ने बताया कि हमारे नेता पप्पू यादव (pappu yadav) ने पहले ही 2 दिसंबर को पार्टी की सभी समितियों और विंगों को भंग कर दिया है और इसकी घोषणा प्रदेश अध्यक्ष राघवेंद्र कुशवाहा (Raghavendra Kushwaha) ने की थी। समितियों और विंगों को भंग करना विलय का संकेत था। इसके साथ, कोई भी किसी भी पद पर नहीं रहेगा।

पप्पू यादव ही पार्टी का इकलौता चेहरा हैं। उनके अलावा कोई भी चुनाव के दौरान भीड़ खींचने में सक्षम नहीं है। चूंकि बिहार में राजद, जदयू और भाजपा जैसी बड़ी राजनीतिक ताकतों के खिलाफ चुनाव लडऩा कठिन होगा, इसलिए सबसे पुरानी पार्टी के साथ विलय एक बुद्धिमान निर्णय है। इससे पहले गुरुवार को कांग्रेस नेता असित नाथ तिवारी ने भी विलय की बात कही थी। सूत्रों के अनुसार, पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन (Ranjit Ranjan) (राजस्थान की कांग्रेस प्रभारी) ने एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पप्पू यादव उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) की राह पर चल रहे हैं, जिन्होंने 2020 के विधानसभा चुनाव में भी बेहद कड़वी हार का स्वाद चखा था। उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) एक भी सीट जीतने में विफल रही। कुशवाहा भी अपनी सीट हार गए। हार के बाद, उन्होंने नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड के साथ अपनी पार्टी का विलय कर दिया। पप्पू यादव भी यही कर रहे हैं। आधा दर्जन से अधिक छोटे राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन होने के बावजूद उनकी पार्टी 2020 के विधानसभा चुनाव में खाता नहीं खोल पाई थी। यादव ने गठबंधन का नेतृत्व किया था जिसने सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन एक भी सीट हासिल नहीं कर सके।