भारत और चीन के बीच पिछले काफी समय से लद्दाख इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और दोनों देशों के सेनाएं आमने सामने खड़ी हैं। लेकिन, भारत किसी भी तरह की कोई ढील नहीं छोड़ना चाहता है। इसी फिंगर 4 और फिंगर 8 की बीच चर्चा हो रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि ये आखिर ये है क्या और क्यों चीन इनके पीछे पड़ा हुआ है।
कुछ सालों से चीन की सेना पैंगोंग झील के किनारे सड़कें बना रही है। 1999 में जब कारगिल की जंग जारी थी तो उस समय चीन ने मौके का फायदा उठाते हुए भारत की सीमा में झील के किनारे पर 5 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई थी।
इस झील के उत्‍तरी किनारे पर बंजर पहाड़ियां हैं जिनको छांग छेनमो कहा जाता है। इन पहाड़ियों के उभरे हुए हिस्‍से को ही सेना 'फिंगर्स' कहती है। भारत का दावा है कि एलएसी की सीमा फिंगर 8 तक है। लेकिन वह फिंगर 4 तक को ही नियंत्रित करती है।
उधर चीन की पोस्ट फिंगर 8 पर है। जबकि चीन की सेना का मानना है कि फिंगर 2 तक एलएसी है। छह साल पहले चीन की सेना ने फिंगर 4 पर स्‍थाई निर्माण की कोशिश की थी, लेकिन भारत के विरोध पर इसे गिरा दिया गया था।
चीन की सेना फिंगर 2 पर पेट्रोलिंग के लिए हल्‍के वाहनों का उपयोग करती है। इस गश्‍त के दौरान भारत की पेट्रोलिंग टीम से उनका आमना-सामना होता है। इसी जगह पर भारतीय सेना उन्‍हें वापस जाने को कह देती है। क्योंकि दोनों देशों के पेट्रोलिंग गाड़ियां उस जगह पर घुमा नहीं सकते। इसलिए गाड़ी को वापस जाना होता है।
कुछ समय पहले चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों को फिंगर 2 से आगे बढ़ने से रोक दिया था। अब खबर है कि चीन के 5,000 सैनिक गलवान घाटी में मौजूद हैं। हालांकि सबसे ज्यादा दिक्कत पैंगोंग लेक के आसपास होती है।
आपको बता दें कि एलएसी 3 सेक्‍टर्स में बंटी है। पहला सेक्टर अरुणाचल प्रदेश से लेकर सिक्किम तक है। दूसरा, हिमाचल प्रदेश और उत्‍तराखंड का हिस्‍सा है और तीसरा है लद्दाख। भारत, चीन के साथ लगी एलएसी करीब 3,488 किलोमीटर पर अपना दावा जताता है, जबकि चीन का कहना है यह बस 2000 किलोमीटर तक ही है।
पैंगोंग का मतलब लद्दाखी भाषा में गहरा संपर्क होता है और त्‍सो एक तिब्‍बती शब्‍द है जिसका अर्थ झील है। यह झील हिमालय में 14,000 फीट से भी ज्‍यादा की ऊंचाई पर है। यह लेह से दक्षिण पूर्व में करीब 54 किलोमीटर की दूरी पर है। 135 किलोमीटर लंबी झील करीब 604 स्‍क्‍वॉयर किलोमीटर से ज्‍यादा के दायरे में फैली है।

इस झील का ज्‍यादा रणनीतिक महत्‍व नहीं है लेकिन यह चुशुल के रास्‍ते में पड़ती है और यह रास्‍ता चीन की तरफ जाता है। किसी भी आक्रमण के समय चीन इसी रास्‍ते की मदद से भारत की सीमा में दाखिल हो सकता है। इसी वजह से चीन इस झील पर कब्जा करना चाहता है।