कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि चुनाव ड्यूटी के दौरान हुई शिक्षकों की मौत के लिए प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया है।  उन्होंने शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव ड्यूटी करने वाले लगभग 700 शिक्षकों की मृत्यु हो चुकी है।  इसमें एक गर्भवती महिला भी शामिल है जिसे चुनाव ड्यूटी करने के लिए जबरन मजबूर किया गया। 

कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता के बारे में एक बार भी विचार किए बिना प्रदेश  की लगभग 60,000 ग्राम पंचायतों में इन चुनावों को कराया गया।  बैठकें हुईं, चुनाव अभियान चला और अब ग्रामीण इलाकों में कोरोना का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है।  ग्रामीण इलाकों में लोगों की बड़ी संख्या में मृत्यु हो रही है जो कि झूठे सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। 

 

पूरे प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में लोगों की घरों में मृत्यु हो जा रही है और इनको कोविड से होने वाली मौतों के आंकड़ों में गिना भी नहीं जा रहा क्योंकि ग्रामीण इलाकों में टेस्ट ही नहीं हो रहे हैं।  प्रदेश सरकार का रुख सच दबाने की तरफ है और उसका अधिकतम प्रयास जनता व लोगों की दिन रात सेवा कर रहे मेडिकल समुदाय को भयभीत करने में रहा है।  प्रदेश में जो घट रहा है वह मानवता के खिलाफ अपराध से कम नहीं है और चुनाव आयोग इसमें भागीदार है। 

प्रदेश के शिक्षक और कर्मचारी संगठनों ने 2 मई को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना ड्यूटी का बहिष्कार करने की घोषणा की है।  शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों ने सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से कोरोना संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में होने तक मतगणना को स्थगित करने की भी मांग की है।  शुक्रवार को वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कर्मचारी एवं शिक्षक संगठनों के नेताओं ने एकजुट होकर मतगणना का बहिष्कार करने की अपील भी की है। 

 

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, कलेक्ट्रेट मिनिस्टीरियल संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार त्रिपाठी, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी, राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष कमलेश मिश्रा, इंदिरा भवन जवाहर भवन कर्मचारी महासंघ और राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश कुमार पांडेय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रामराज दुबे सहित अन्य कई संगठनों के नेताओं ने कहा कि सरकार कर्मचारी विरोधी रवैया अपना रही है। कर्मचारी नेताओं ने दो मई को प्रस्तावित पंचायत चुनाव मतगणना का बहिष्कार करने का निर्णय लिया।