पाकिस्तान आए दिन कोई न कोई मुसीबत में नजर आ ही जाता है. इस बार की जो मुसीबत है, वह पानी की है. पाकिस्तान का सिंध प्रांत इन द‍िनों की पानी की किल्लत से जूझ रहा है. इसको लेकर दर्जनों लोगों ने थारपारकर जिले के मिठी शहर में इमरान खान सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया. 

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डॉन अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, कौमी अवामी तहरीक पार्टी के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन हुआ है. पार्टी के नेताओं ने कहा कि इस संकट के लिए जन स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं.

नेताओं ने कहा कि शहर के निवासियों को ऊंची कीमतों पर पानी की बोतल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा है. उन्होंने आगे कहा कि जो लोग आवश्यक वस्तुओं को खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकते थे, उन्हें कुओं का अत्यधिक जहरीले पानी पीने के लिए मजबूर किया गया है. उन्होंने कहा कि सभी रिवर्स ऑस्मोसिस प्लांट पीएचडी और निजी फर्मों के अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के कारण काम करना बंद कर चुके हैं. प्लांट की कीमत लगभग 15 ब‍िल‍ियन पाकिस्‍तानी रुपये है.

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यह विरोध पाकिस्तान में जारी जल संकट के बीच आया है और यह देश की स्थिरता के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है. टोरंटो स्थित थिंक टैंक इंटरनेशनल फोरम फॉर राइट एंड सिक्योरिटी (IFFRAS) के अनुसार, जल संकट ने विरोध प्रदर्शनों की एक सीरीज शुरू कर दी है और पाकिस्तान की बीमार अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है. साथ ही प्रांतों के बीच झगड़े को बढ़ा सकता है.

सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों के किसानों ने सिंधु नदी से अपने हिस्से का पानी छोड़ने की मांग के लिए प्रमुख राजमार्गों को अवरुद्ध करना शुरू कर दिया है. थिंक टैंक ने कहा कि सबसे अमीर और राजनीतिक रूप से बहुल पंजाब प्रांत पर अक्सर नदी के पानी की उच्चतम और अनुचित मात्रा को आवंटित करने का आरोप लगाया जाता है, जबकि अन्य प्रांतों को सूखा छोड़ दिया जाता है.