भले ही अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने से पाकिस्तान खुश हो रहा है, लेकिन उसे खुद इसका अंजाम भुगतना पड़ सकता है। इसकी मार उसकी अर्थव्यस्था पर पड़ सकती है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। अब भी लगातार उसका प्रत्यक्ष विदेशी निवेश गिर रहा है। पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक बीते कुछ सालों में पाकिस्तान में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में जिस तरह से गिरावट आई है, वह इकनॉमिक मैनेजर्स के लिए चिंता की बात है। जुलाई महीने में पाकिस्तान में बीते साल की तुलना में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 39 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।

बीते साल के मुकाबले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 29 फीसदी यानी 1.85 अरब डॉलर की कमी देखने को मिली है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के बीते 4 साल के डेटा के मुताबिक पाकिस्तान में एफडीआई लगातार कम हो रहा है। आंकड़ों को देखें तो 2016 में पाकिस्तान का एफडीआई स्टॉक 41.9 बिलियन डॉलर था, जो 2020  में तेजी से घटते हुए 35.6 बिलियन डॉलर ही रह गया। पाकिस्तानी अखबार ने कहा कि अब अफगानिस्तान में पैदा हुए संकट का एक बार फिर से असर देखने को मिल सकता है। इसके चलते पाकिस्तान में होने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में बड़ी कमी हो सकती है।

अखबार के मुताबिक पाकिस्तान के एक्सपोर्ट रेवेन्यू में कमी देखने को मिल सकती है। अफगानिस्तान में अस्थिरता के चलते ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं। अफगानिस्तान में पैदा हुए संकट के बीच पाकिस्तान ने अपनी सीमा के निकट शरणार्थी कैंप लगाने का फैसला लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में अफगानिस्तान से आए 30 लाख शरणार्थी रह रहे हैं। इनमें से आधे तो अवैध रूप से ही बसे हुए हैं। पाकिस्तान व्यापारिक घाटे के संकट से भी गुजर रहा है। जुलाई में पाकिस्तान का व्यापारिक घाटा 3.058 बिलियन डॉलर था।