पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को लेकर अब पाकिस्तान भी भड़क गया है और फ्रांस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इससे पहले टर्की फ्रांस के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है। दरअसल, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस्लाम को लेकर दिए गए बयान और पैगंबर मोहम्मद के कार्टून प्रकाशित किए जाने को लेकर पाकिस्तान ने फ्रांस के राजदूत मार्क बेर्टी को समन किया और कड़ी आपत्ति जाहिर की।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जाहिद हाफिज चौधरी ने कहा कि फ्रांस के राजदूत को विशेष सचिव (यूरोप) के जरिए एक डोजियर दिया गया है। फ्रांस के राजदूत के सामने पैगंबर मोहम्मद के कार्टून और राष्ट्रपति मैक्रों की टिप्पणी को लेकर पाकिस्तान ने विरोध दर्ज कराया।
मैक्रों ने बुधवार को कहा था कि पैगंबर मोहम्मद के कार्टून प्रकाशित किए जाने को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। फ्रांस के एक स्कूल में सैमुअल पैटी नाम के टीचर ने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था जिसकी हाल ही में हत्या कर दी गई। मैक्रों ने अपने बयान में कहा कि टीचर की हत्या इसलिए की गई क्योंकि इस्लामिस्ट हमारा भविष्य चाहते हैं।
रेडियो पाकिस्तान के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सोमवार को कहा कि मैक्रों का बयान गैर-जिम्मेदाराना है और आग में घी डालने का काम कर सकता है। कुरैशी ने कहा, किसी को भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में लाखों मुसलमानों की आबादी की भावनाओं को आहत करने का अधिकार नहीं है।
कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वो इस मामले का संज्ञान ले और इस्लाम के प्रति नफरत फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो। सोमवार को जारी किए गए बयान में कुरैशी ने कहा कि इस्लामिक सहयोग संगठन की अगली बैठक में 15 मार्च को इस्लामोफोबिया विरोधी दिवस के तौर पर मनाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के धार्मिक मामलों के सलाहकार हाफिज ताहिर महमूद अशरफी ने कहा कि आपत्तिजनक कार्टून का मुद्दा इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की बैठक में भी पेश किया जाएगा। एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि फ्रांस ने लाखों मुसलमानों की भावनाएं आहत की हैं।
इससे पहले, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी मैक्रों के बयान की आलोचना की थी। इमरान खान ने कहा था कि मैक्रों की टिप्पणी इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देती है। इसके साथ ही, उन्होंने फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग को एक चिठ्ठी लिखी थी जिसमें सोशल मीडिया साइट पर इस्लामोफोबिया से जुड़े कंटेंट को बैन करने की मांग की थी। इमरान खान ने इसे लेकर कई ट्वीट्स किए थे। उन्होंने लिखा था कि असली नेता वो है जो लोगों को जोड़ने का काम करता है, जैसे कि दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला ने किया था।
इमरान खान ने अफसोस जताते हुए कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने हिंसा करने वाले आतंकवादियों को निशाना बनाने के बजाय इस्लाम पर हमला किया जिससे इस्लामोफोबिया को प्रोत्साहन मिलेगा। इमरान खान ने कहा कि मुस्लिमों, व्हाइट सुप्रीमेसिस्ट हों या नाजी विचारधारा हो, हिंसा करने वाले आतंकवादियों की ही आलोचना की जानी चाहिए।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा, इस्लाम को ठीक से समझे बिना उस पर हमला करके मैक्रों ने यूरोप औऱ पूरी दुनिया के लाखों मुसलमानों की भावनाएं आहत की हैं। उन्होंने कहा कि इस दुनिया को अब ध्रुवीकरण की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। अज्ञानता के आधार पर बनी जनभावना से नफरत और बढ़ेगी, इस्लामोफोबिया बढ़ेगा और चरमपंथियों के लिए और मौके बनेंगे।