नई दिल्ली। कंगाल हो चुके पाकिस्तान में अब बचे खुचे हिंदू भी खतरे में आ चुके हैं. ऐसा इसलिए है कि पाकिस्तान ने विश्वविद्यालयों के लिए नया प्रस्ताव पास किया है जो हिंदूओं के लिए बेहद खतरनाक है. इस नए कानून के अनुसार अब देश के सभी विश्वविद्यालयों में कुरान पढ़ाना अनिवार्य हो गया है. आपको बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में अपने सम्बोधन में पाकिस्तान में सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए कहा था. लेकिन अब ये नया इस्लामिक प्रस्ताव का आना सबको हैरान करने वाला है. 

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विश्वविद्यालय में कुरान पढ़ना अनिवार्य

पाकिस्तान में पारित प्रस्ताव के अनुसार वहां के सभी विश्वविद्यालय में कुरान को अनुवाद के साथ पढ़ाया जाएगा. हालांकि, इस पढ़ाई के लिए छात्रों को अलग से कोई परीक्षा नहीं देनी होगी और न ही छात्रों को इसके लिए अलग से कुछ नंबर मिलेंगे. लेकिन यह पढ़ना अनिवार्य है. एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सिर्फ जानकारी और ज्ञान अर्जित करने के लिए लागू होगा. सरकार का उद्देश्य कुरान में लिखी बातों को समाज में फैलाने का है. इस नए कानून के तहत विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों को पैगंबर मोहम्मद के बारे में पढ़ाया जाएगा.

सभी धर्म के छात्रों को कुरान पढ़ना अनिवार्य

यह नया कानून पाकिस्तान में पढ़ने वाले सभी धर्मों के छात्रों पर लागू होगा. यानी हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों और पारसियों सहित सभी धर्म के छात्रों को कुरान का पाठ करना होगा. इस प्रस्ताव को जमात-ए-इस्लामी पार्टी के सांसद मुश्ताक अहमद ने पेश किया. प्रस्ताव को पेश करते हुए उन्होंने कहा कि ये प्रस्ताव संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हैं.

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पाकिस्तान पर उठते रहे हैं सवाल 

आपको बता दें कि पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की आजादी को लेकर लगातार बातें होती हैं. पहले भी कई ऐसे मामले आ चुके हैं जिसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भी स्वीकार किया है कि देश में लगातार हो रही हिंसक घटनाओं की वजह से अल्पसंख्यक खुद को कमजोर और डरा हुआ महसूस कर रहे हैं.