अमेरिका के वरिष्ठ सांसद और राष्ट्रपति जो बाइडेन के खास जैक रीड ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के हार का ठीकरा पाकिस्तान पर फोड़ा है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान के जड़ें जमाने के पीछे की वजह पाकिस्तान में मौजूद उसकी सुरक्षित पनाहगाहें हैं। तालिबान के सफल होने में इन ठिकानों का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने यह भी बताया कि अफगानिस्तान की जंग में पाकिस्तान ने दोनों ओर फायदा उठाने की कोशिश की। बता दें कि एक दिन पहले ही बाइडन ने अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी को लेकर नई तारीख का ऐलान किया था।

सीनेट आम्र्ड सर्विस कमेटी के अध्यक्ष जैक रीड ने अमेरिकी संसद में कहा कि तालिबान के सफल होने में बहुत बड़ा योगदान इस तथ्य का है कि तालिबान को पाकिस्तान में मिल रही सुरक्षित पनाहगाह को खत्म करने में अमेरिका विफल रहा है। हाल के एक अध्ययन का हवाला देते हुए रीड ने कहा कि पाकिस्तान में सुरक्षित अड्डा होने और इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस (आईएसआई) जैसे संगठनों के जरिए वहां की सरकार का समर्थन मिलने से तालिबान मजबूत होगा गया।

उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान में मौजूद तालिबान के सुरक्षित पनाहगाहों को नष्ट नहीं कर पाए, यही विफलता इस जंग में हमारी सबसे बड़ी गलती साबित हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि जैसा कि अफगान स्टडी समूह (कांग्रेस के निर्देश के तहत कार्यरत) ने कहा कि आतंकवाद के लिए ये पनाहगाह जरूरी हैं। इसके अलावा पाकिस्तान की आईएसआई ने अवसरों का फायदा उठाने के लिए अमेरिका के साथ सहयोग करते हुए तालिबान की मदद की।

रीड ने कहा कि 2018 के आकलन के अनुसार पाकिस्तान ने प्रत्यक्ष सैन्य और खुफिया सहयोग प्रदान किया जिसके नतीजतन अमेरिकी सैनिक, अफगान सुरक्षा बल के जवान और नागरिक मारे गए। इससे अफगानिस्तान में बहुत तबाही हुई। तालिबान को यह समर्थन पाकिस्तान द्वारा अमेरिका के सहयोग के विरोधाभासी है। उन्होंने अपने हवाई क्षेत्र और अन्य अवसंरचनाओं के इस्तेमाल की भी अनुमति दी जिसके लिए अमेरिका ने बहुत आर्थिक मदद की है।