पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर मामले में पाकिस्तान की किरकिरी होने के बाद भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। एक बार फिर पाकिस्तान दुनिया की चुप्पी को तोड़ने के लिए कश्मीर मुद्दे पर नए सिरे से राजनयिक पहल और मीडिया अभियान शुरू करने जा रहा है। विदेश मामलों की सलाहकार समिति की बैठक और एक अन्य मंत्री स्तरीय कमेटी की बैठक में इस राजनयिक पहल और मीडिया अभियान के बारे में विचार किया गया है।

दोनों बैठकों की अध्यक्षता विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने की। इन बैठकों में कश्मीर में लगातार खराब हो रही मानवाधिकारों की स्थिति, नियंक्षण रेखा पर भारत द्वारा संघर्ष विराम के लगातार उल्लंघन और भारत के नागरिकता कानून पर विचार विमर्श किया गया। विदेश मामलों की सलाहकार समिति की बैठक में कई पूर्व विदेश सचिवों और विदेश मामलों के विशेषों  ने हिस्सा लिया। इसमें कहा गया कि सरकार को कश्मीर के हालात के बारे में विश्व समुदाय को आगाह करने के लिए नए सिरे से राजनयिक प्रयास करने की जरूरत है।

बैठक में कुरैशी के साथ कई संघीय मंत्री, प्रधानमंत्री के सुरक्षा मामलों के सलाहकार व कुछ अन्य मामलों के सलाहकार और विदेश सचिव सोहैल महमूद ने हिस्सा लिया। इसमें मुख्य रूप से इस बात पर विचार किया गया कि विदेश नीति के खास मुद्दों, जिसमें कश्मीर का मुद्दा प्रमुखता से शामिल है। कश्मीर पर पाकिस्तानी रुख को स्पष्ट करने के लिए मीडिया का सहारा किस रूप में लिया जा सकता है। बैठक में कुरैशी ने कहा कि सरकार कश्मीरियों की तकलीफों को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध है। संयुक्त राष्ट्र समेत हर मंच से कश्मीरियों की आवाज उठाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज से कश्मीरियों की तकलीफों की तरफ दुनिया का ध्यान जाएगा। बयान में कुरैशी ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के खिलाफ प्रदर्शन से भारत स्पष्ट रूप से दो हिस्सों में बंट गया है। एक हिस्सा भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप की तरफ है और एक हिस्सा हिंदुत्व एजेंडे की तरफ। यह किसी एक धर्म या क्षेत्र तक नहीं है, बल्कि पूरे भारत में फैल गया है। पाक के विदेश मंत्री ने दुनिया से भारतीय अल्पसंख्यकों के लिए आवाज उठाने की अपील की।

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