अफगानिस्तान में तालिबान की मदद के लिए पाकिस्तानी सेना के सैकड़ों अधिकारियों और सैनिकों के अलावा लश्करे तैयबा के हजारों आतंकवादी मौजूद हैं जो सरकारी सेनाओं के खिलाफ मदद कर रहे हैं। सुरक्षा और खुफिया रिपोर्टों में यह जानकारी मिली है। 

अफगानी खुफिया एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अफगानिस्तान में इस समय पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई के लगभग 300 अधिकारी तथा कर्मचारी हैं। सूत्रों ने  बताया कि पाकिस्तानी सेना के ये अधिकारी वहां तालिबान की मदद कर रहे हैं और इनका पता उस समय चला है जब वहां अनेक तालिबानियों की मौत के बाद घटनास्थल से पाकिस्तानी सेना के परिचय पत्र बरामद हुए। 

सूत्रों ने बताया कि अफगानिस्तान में इस समय सेना के अनेक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी हैं जिनमें लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारी भी है जो तालिबान को सैन्य अभियानों में मदद कर रहे हैं। सेना के ये अधिकारी अफगानी सेना के खिलाफ तालिबान की मदद कर रहे हैं। गौरतलब है कि अफगानिस्तान के पहले उपराष्ट्रपति अमरूल्लाह सालेह ने बताया है कि पाकिस्तान इस समय तालिबान की मदद कर रहा है और पाकिस्तानी वायु सेना ने अफगानी वायु सेना को चेतावनी दी है कि वह कंधार में तालिबान के खिलाफ कोई हवाई कार्रवाई नहीं करें। खुफिया अनुमानों के मुताबिक पाकिस्तान ने लश्कर के सात हजार से अधिक आतंकवादियों को अफगानिस्तान में तालिबान की मदद के लिए भेजा है ताकि वे तालिबान के समर्थन में लडाई कर सकें। 

ये आतंकवादी इस समय देश के उत्तरी और उत्तर पूर्वी इलाके में हैं और तालिबान के अधिकतर सैन्य अभियानों को आईएसआई ही निर्देशित कर रही है। एक खुफिया सूत्र ने बताया कि यह भी पाया गया है कि अफगानी सुरक्षा बलों की चौकियों को पाकिस्तानी स्पेशल फोर्सेज के जवान रात के अंधेरे में निशाना बना रहे हैं ताकि उनकी पहचान भी छिपी रहे और यह साबित हो सके कि तालिबान ने ही इन घटनाओं को अंजाम दिया है। इस बात की भी जानकारी मिली हैं कि तालिबानी आतंकवादी अफगानिस्तान के बड़े बांधों खासकर भारत की मदद से बनाए गए सलमा बांध को उड़ाने की कोशिशों में हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि इस लडाई में ईरान की भूमिका भी है और वह सेना के बजाए तालिबान को हथियार तथा उपकरणों की आपूर्ति कर रहा है।