जोन परत में मौजूद छेद बड़ा (ozone hole) हो गया है। उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों से पता चलता है कि ओजोन का छिद्र बड़ा होकर 2.48 करोड़ वर्ग किलोमीटर हो गया है। यह आकार भारत के आकार से आठ गुना बड़ा है। यह खुलासा नेशनल एरोनोटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) (NASA) और नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉसफेयरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) (NOAA) की रिपोर्ट में हुआ है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में ओजोन छिद्र (ozone hole of antarctica) का आकार अधिकतम स्तर पर पहुंच गया है। नासा के मुख्य भूविज्ञानी पॉल न्यूमैन (Paul Newman) ने बताया, इतना विशाल ओजोन छिद्र 2021 में औसत ठंड से ज्यादा सर्द होने के कारण है और मोंट्रियाल प्रोटोकॉल नहीं होता तो कहीं बड़ा हो सकता था।

वैज्ञानिकों का कहना है कि दक्षिणी गोलार्द्ध में सामान्य से ज्यादा ठंड होने से ओजोन परत का छेद (ozone hole)  औसत से ज्यादा बड़ा हो गया है, जिसके इस साल नवंबर से दिसंबर तक बने रहने की उम्मीद है। बता दें कि जब अंटार्कटिका में सर्दी का मौसम खत्म होता है और सूर्योदय होता है, तो यहां जमा क्लोरीन और ब्रोमीन ओजोन खत्म करने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाएं शुरू कर देते हैं। एक क्लोरीन या ब्रोमीन का अणु हजारों ओजोन अणुओं को नष्ट कर देता है। इस ओजोन परत के छेद पर वैज्ञानिक दक्षिणी ध्रुव स्टेशन से मौसमी गुब्बारे में ओजोन मापी यंत्र रख कर छोड़ते हैं जो ओजोन की बदलती मात्रा का मापन करते हैं।