बिहार विधान परिषद में उस वक्त जमकर बवाल हुआ जब उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के कहने पर कांग्रेस के सदस्य प्रेमचंद मिश्र ने बंडी और कुर्ता उतारकर पुलिस हमले की चोट दिखा दी। दरअसल कांग्रेस सदस्य राजभवन मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर हंगामा कर रहे थे। सभापति ने इन्हें रूकने को कहा पर किसी ने नहीं सुना, संसदीय कार्यमंत्री श्रवण कुमार भी इन्हें सीट पर बैठने को कह रहे थे। इसके बाद मोदी ने वेल में नारेबाजी कर रहे कांग्रेसी सदस्यों से कहा कि कहां चोट लगी है, कपड़े उतारकर दिखाइए। मिश्र के ऐक्शन पर सदन सन्न रह गया। मोदी का चेहरा भी तब देखने योग्य बन आया था। 

बता दें कि बिहार विधान परिषद में मुख्य विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और उसकी सहयोगी कांग्रेस ने प्रदेश कांग्रेस के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम जन वेदना मार्च के दौरान पुलिस लाठीचार्ज को लेकर आज भारी शोरगुल एवं नारेबाजी की, जिसके कारण सदन की कार्यवाही भोजनावकाश तक के लिए तय समय से पूर्व भी स्थगित कर दी गई। कार्यकारी सभापति हारून रशीद के आसन ग्रहण करते ही कांग्रेस के प्रेमचंद्र मिश्रा ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए इस मामले को उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस की ओर से राजधानी पटना में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत जन वेदना मार्च निकाला गया। पुलिस की ओर से अकारण लाठीचार्ज, अश्रु गैस तथा वाटर कैनन छोड़ा जाना पुलिस दमन की पराकाष्ठा के रूप देखने को मिला है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम से शांतिपूर्ण तरीके से पार्टी के कार्यकर्ता शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए पंत भवन, बोरिंग रोड पहुंचे ही रहे थे कि उनके ऊपर बगैर किसी उकसावे के वाटर कैनन तथा आंसू गैस छोड़ा जाने लगा तथा पुलिस बैरिकेटिंग से आगे बढ़े बिना ही उन पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया।

कांग्रेस सदस्य ने कहा कि पूरी कार्रवाई कहीं ना कहीं पुलिस की दमनात्मक कार्रवाई की श्रेणी में था। उन्होंने कहा कि न तो किसी भी कार्यकर्ता ने पुलिस बैरिकेटिंगग को पार किया था और न ही किसी ने पुलिस पर पत्थर ही फेंका, लेकिन उनके विरुद्ध पुलिस बल प्रयोग करना अलोकतांत्रिक तथा दमनात्मक कार्रवाई है, जो निंदनीय है। मिश्रा ने कहा कि उक्त कार्यक्रम में हजारों कार्यकर्ता, दो सांसद, विधायक, विधान पार्षद, प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, पार्टी के बिहार मामलों के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल थे। प्रशासन ने अकारण लाठीचार्ज कर सारी मर्यादाओं को तोडऩे का काम किया है। पुलिस लाठीचार्ज में 27 कार्यकर्ताओं को चोट आई है तथा प्रमुख नेताओं को राज्यपाल से मिलवाने के बहाने पटना के कोतवाली थाने में लाकर बैठा दिया गया था। 

कांग्रेस सदस्य ने कहा कि पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और किसी भी तरह से किसी को उकसाया नहीं गया था। प्रशासन को पूर्व से ही सूचित भी कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि प्रमुख नेताओं के खिलाफ दस-दस धाराओं पर मुकदमा लगाया गया है। सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।   इस पर कार्यकारी सभापति ने विधान परिषद की कार्य संचालन नियमावली का हवाला देकर मिश्रा के कार्यस्थगन को अस्वीकृत कर दिया। उनके इतना कहते ही राजद और कांग्रेस के सदस्य शोरगुल एवं नारेबाजी करते हुए सदन के बीच में आ गए। कार्यकारी सभापति के बार-बार समझाने के बावजूद राजद और कांग्रेस के सदस्य नारेबाजी करते रहे। शोरगुल के बीच ही अल्प सूचित तथा तारांकित प्रश्नों का उत्तर सरकार की ओर से दिया जाता रहा, जिसे सुना नहीं जा सका। 

शोरगुल के बीच ही उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि यदि लाठीचार्ज हुआ है, मिश्रा को चोट लगी है तो वह सदन के अंदर कपड़ा खोलकर दिखाएं। इस पर मिश्रा ने घोर आपत्ति जताते हुए अपनी बंडी खोल दी तभी राजद के वरिष्ठ सदस्य रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि कपड़ा खोलकर पीठ दिखाने के लिए कहना सरकार की ओर से अपमान किया जाना है। इस पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के दिलीप चौधरी ने कहा कि झूठा नौटंकी हो रहा है इसकी मेडिकल जांच होनी चाहिए। कार्यकारी सभापति के बार-बार आग्रह करने पर भी राजद और कांग्रेस के सदस्य नहीं माने और सरकार विरोधी नारेबाजी करते रहे।

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