दिल्ली के एक अस्पताल में कोरोना संक्रमण (corona cases in delhi) को मात देकर एक महीने का शिशु स्वस्थ होकर घर लौटा है। यह वो पल था जहां अस्पताल के डॉक्टर भी खुद को रोने से रोक नहीं पाए। अस्पताल में नियोनेटोलॉजी और बाल रोग विभाग की सलाहकार डॉ प्रीति चड्ढा ने कहा कि बच्चे में चिड़चिड़ापन था और वह उसे हल्क बुखार भी था। इसके बाद एहतियातन रैपिड एंटीजन टेस्ट (rapid antigen test) किया गया, जिसमें बच्चा कोविड पॉजिटिव निकला। 

 

उन्होंने बताया कि हमने बच्चे एनआईसीयू में भर्ती किया 48 घण्टे बाद बच्चे की सेहत में कुछ सुधार हुआ। इसके बाद बच्चे के माता-पिता का भी कोरोना टेस्ट (Corona Test) किया, जिसमें वे भी संक्रमित निकले। बता दें कि दिल्ली में कोरोना (corona cases in delhi) के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। वहीं शुक्रवार को 24 हजार से अधिक मामले सामने आए थे। वहीं कोरोना अब बच्चों को भी शिकार बना रहा है। अस्पताल में बीते करीब 15 दिनों से रोजाना हल्के लक्षण वाले 2-3 बच्चे भर्ती हो रहे हैं, लेकिन हल्के लक्षण के चलते उन्हें होम आइसोलेशन में इलाज की ही सलाह देते हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 9 से 12 जनवरी के बीच 37 की मौत (death to corona) हो चुकी है। इसमें सात की उम्र 18 साल से भी कम थी, वहीं तीन ने अभी तक अपना पहला जन्मदिन नहीं मनाया था।  मधुकर रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अनामिका दुबे ने कहा कि कोविड -19 से पीडि़त बहुत कम बच्चों को ही अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत होती है। उन्होंने कहा, 1 जनवरी के बाद से हमारे पास 10-12 बच्चे भर्ती हुए। अधिकांश को खराब पोषण और बुखार के कारण भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने कहा कि मल्टी-सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम का समय पर पता लगाने के लिए कड़ी निगरानी की जरूरत है। कोविड -19 (Covid19) के कारण अधिकांश बच्चे बुखार, गले में खराश, नाक बहना और खांसी से पीडि़त हैं। बहुत कम प्रतिशत बच्चों में निमोनिया, तेजी से सांस लेने और ऑक्सीजन के निम्न स्तर के लक्षण मिले हैं।