एक तरफ भाजपा सरकार पूरे देश में एेतिहासिक राष्ट्रीय धरोहरों को सहेज कर रखने का जोर-शोर से प्रयास कर रही है तो दूसरी तरफ सरकारी विभाग के ही कुछेक अधिकारी की कथित लापरवाही और उदासीनता के कारण एेतिहासिक धरोहर नष्ट हो रही है। सरकारी विभाग की इसी तरह की लापरवाही का नमूना आज दरंग जिले के पथरूघाट में देखने को मिला।

उल्लेखनीय है कि 28 जनवरी 1894 को ब्रिटिश शासन द्वारा अवैध रूप से कर वृद्धि करने के विरोध में पथरूघाट के किसानों ने आंदोलन किया। निहत्त किसान बढ़ाए गए कर को घटाना चाहते थे लेकिन ब्रिटिश शासन तैयार नहीं हुआ और आंदोलन को दबाने के लिए ब्रिटिश शासन ने अहिंसक आंदोलन कर रहे किसानों पर गोलियां चला दी।

सन् 1919 में जलियावाला बाग हत्याकांड से लगभग 25 वर्ष पहले हुए इस गोलीकांड में 140 किसान शहीद हो गए और अंग्रेज हुकूमत ने हिंदू- मुसलमान का फर्क नहीं करते हुए सभी 140 मतृकों के शवों को एक गड़्ढा खोद कर सामूहिक रूप से दफन कर दिया । देश के स्वाधीन होने के बाद इस पावन भूमि को सहेजकर रखने की प्रक्रिया शुरू की गई और इसी क्रम में सेना ने शहीद किसानों को श्रद्धांजलि देते हुए शहीद स्मारक बनाया और इसी स्थान पर प्रतिवर्ष 28 जनवरी को राज्य सरकार कृषक शहीद दिवस मनाती है और सेना 29 या 30 जनवरी को शहीद किसानों को श्रद्धांजलि देती है। सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिए वर्तमान में 7 करोड़ रुपए की लागत से दो परियोजनाओं पर काम कर रही है, जिनमें कृषि विभाग भवन निर्माण कर रहा है जबकि पीडब्ल्यूडी चहारदीवारी और मिट्टी भराई का काम कर रहा है।

आज इसी मिट्टी भराई के चक्कर में पीडब्ल्यूडी विभाग ने इस पावन सामूहिक कब्र पर जेसीबी से खुदाई कर पूरे परिसर को तहस-नहस कर दिया। एक सरकारी विभाग द्वारा एेतिहासिक महत्व के इस पवित्र धरोहर को तहस-नहस करने को लेकर स्थानीय दल-संगठनों के साथ पक्षकारों ने भी असंतोष व्यक्त किया और इस संबंध में ठोस कदम उठाने की मांग की और दोषी अधिकारी को तत्काल बर्खास्त कर गिरफ्तार करने की मांग की।