देश में हर साल भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार विशेष उत्सव के साथ मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण की विशेष पूजा- अर्चना करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। संतान प्राप्ति, आयु और समृद्धि जैसी सारी सुख की प्राप्ति होती है। इस दिन लोग उपवास रखने के साथ भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की विशेष पूजा करते हैं। भगवान कृष्ण को दही-दूध और मक्खन विशेष पसंद है, ऐसे में दही का चर्णामृत बनाकर लोगों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।

दूध-दही के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व में पंजीरी का भी विशेष महत्व होता है। प्रसाद के रूप में पंजीरी बांटी जाती है। पंजीरी का मतलब पांच प्रकार के चीजों से बना हुआ विशेष प्रसाद। इस बार जन्माष्टमी के दिन आप भी घर पर पंजीरी बनाकर भगवान को इसका भोग लगाएं और इसका प्रसाद बांटें, विशेष कृपा प्राप्त होगी। आइए पंजीरी बनाने की विधि जानते हैं।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार पर भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जन्माष्टमी की विशेष पूजा करने के लिए घर में मौजूद भगवान की प्रतिमा को पीले रंग के वस्त्र पहना कर, धूप-दीप से वंदन करें। भगवान को पुष्प अर्पित करें, चंदन लगाएं। भगवान कृष्ण को दूध-दही, मक्खन विशेष पसंद हैं, ऐसे में इसका प्रसाद बनाएं और भगवान को अर्पित करें और सभी को वही प्रसाद दें। प्रसाद में पंजीरी का विशेष महत्व होता है।

सामान्यतौर पर पंजीरी दो प्रकार की होती है, एक धनिया की पंजीरी और दूसरी- नारियल की पंजीरी। धनिया की पंजीरी बनान के लिए घी के साथ साबुत धनिया को अच्छी तरह से भून लें। अब इसी तरह से आटा को भी घी के साथ भून लें। दोनों को भूनने के बाद आटा में धनिया को मिला दें। इसमें सूखे मेवे, मिश्री, माखन और पिसी हुई चीनी मिलाएं। इस तरह धनिया पंजीरी तैयार हो जाएगी। इसी तरह से पंजीरी में नारियल डालकर आप नारियल की पंजीरी भी बना सकते हैं।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी चूंकि भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व है, इसलिए इसमें श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आरधना करने के विशेष लाभ हैं। घर में भगवान कृष्ण के लड्डू गोपाल स्वरूप को स्थापित करें, उन्हें पीले वस्त्र पहनाकर चंदन लगाएं। भगवान के बाल स्वरूप की आराधना करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूरे श्रद्धा भाव के साथ भगवान से घर-परिवार के सुख-शांति की प्रार्थना करें।