मानवता और निस्वार्थ सेवा ही इंसान का सबसे बड़ा धन होता है इसका हाल ही में एक ऐसा उदाहरण सामने आया है जिसको लेकर हर कोई हैरान है। यह उदहारण ओडिशा (odisha) के कटक जिले से समाने आया है। यहां वृद्ध महिला ने महानता और बड़प्पन का परिचय देते हुए निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे एक रिक्शा चालक के नाम अपना तीन मंजिला घर और पूरी संपत्त‍ि करने का फैसला किया है।

वृद्ध महिला (old woman) का उसके परिजन विरोध कर रहे हैं लेकिन वह अपनी फैसले पर अटल है। वर्तमान समय में घर के साथ जेवरात और अन्य घरेलू सामानों की कीमत करीब 1 करोड़ रुपये बताई गई है।

यह कहानी 63 वर्षीय एक महिला मिनाती पटनायक की है। मिनाती कटक जिले के सुताहटा इलाके में रहती हैं। पिछले साल अपने पति कृष्ण कुमार पटनायक के देहांत के बाद मिनाती अपनी बेटी कोमल के साथ घर पर रहने लगी। पति के देहांत के छह महीने बाद बेटी कोमल की हार्ट अटैक से मौत की खबर ने मिनाती को पूरी तरह से बेबस और लाचार बना दिया। ऐसे समय में मिनाती के परिजनों ने भी उसे अकेला ज‍िंंदगी बिताने के लिए छोड़ दिया।

खबर है कि रिक्शा चालक बुद्धा सामल और उसके परिवार ने निस्वार्थ भाव और इंसानियत के साथ मिनाती पटनायक का पूरा ख्याल रखा। सामल और उसका परिवार न केवल मिनाती का अकेलापन दूर करता था बल्कि अस्पताल से लेकर घर तक नियमित रुप से ध्यान रखता था।

मिनाती पटनायक ने कहा कि मैं अपनी पूरी संपत्त‍ि को एक गरीब परिवार को दान में देना चाहती थी। मैंने अपनी पूरी संपत्त‍ि कानूनी रूप से रिक्शा चालक सामल के नाम करने का फैसला ल‍िया है ताकि मेरे मरने के बाद उसे संपत्त‍ि को लेकर कोई परेशान नहीं कर सके।