सेना, विशेष बल, असम राइफल और खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त अभियान में नागालैंड के उग्रवादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (एनएससीएन-के-युंग आंग) गुट का स्वयंभू मेजर जनरल तथा मोस्ट वांटेड उग्रवादी यांगहांग उर्फ मोपा को गिरफ्तार कर लिया गया है।
असम राइफल (उत्तर) के महानिरीक्षक मेजर जनरल पी. सी. नायर ने शनिवार को बताया कि सुरक्षा बलों के जवान काफ़ी दिनों से मोपा की तलाश कर रहे थे। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को पुख्ता सूचना मिलने पर सेना और असम राइफल्स के जवानों ने घेराबंदी की और मोपा को उसके दो साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया।
मोपा को 25 मई को असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर किए गए हमले के लिए जिम्मेदार माना जाता है, जिसमें असम राइफल्स के दो सैनिक शहीद हुए थे। उन्होंने बताया कि पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांङ्क्षडग लेफ्टिनेंट जनरल एम. एम. परवाने ने पांच जून को अग्रिम इलाकों के दौरे के दौरान असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर किये गये हमलों के लिए जिम्मेदार उग्रवादियों के बारे में सूचना देने वाले को पांच लाख रुपये नगद इनाम देने की घोषणा की थी।
उन्होंने कहा कि स्वयंभू मेजर जनरल यांगहांग भारत में अपने गुट का सर्वोच्च रैंङ्क्षकग कैडर है और जबरन वसूली तथा हत्या जैसे कई जघन्य अपराधों की साजिश रचने या उसे अंजाम देने में शामिल रहा है। वह नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के पूरे इलाके में अपने गुट के सभी अभियानों को नियंत्रित करता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है।
जनरल नायर ने कहा कि मोपा की गिरफ्तारी सुरक्षा बलों और राज्य सरकारों के लिए भारी जीत है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने सभी उग्रवादी कैडरों से अपील की है कि वे ङ्क्षहसा के रास्ते को छोड़ दें और पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति तथा विकास के लिए केंद्र सरकार की पहल में शामिल हों। गौरतलब है कि एनएससीएन (के) गिरोह के $खलिाफ़ सुरक्षा बल काफ़ी दिनों से अभियान चला रहे हैं।
वर्ष 2015 में चार जून को मणिपुर के चंदेल जिले में एनएससीएन (के) ने भारतीय सेना के एक क़ाफ़लिे पर हमला किया जिसमें 18 सैनिक शहीद हुए थे। इसके बाद 10 जून 2015 को भारतीय सेना ने भारत-म्यामांर सीमा पर बने एनएससीएन (के) के शिविरो पर बड़ा हमला किया था जिसमें कई उग्रवादी मारे गये थे।