केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा 2 जनवरी को नई दिल्ली में असम समझौते के अनुच्छेद-6 के क्रियान्वयन के लिए उच्च समिति गठन की घोषणा पर अखिल असम छात्र संघ और कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएसए) ने गहरा असंतोष व्यक्त किया है। आसू नेतृत्व ने गृह मंत्री की इस घोषणा को खट्टे आम को दोबारा बेचने की कोशिश बताया, वहीं केएमएसएस इसे असमिया जाति का घोर अपमान बताया है।

दोनों संगठनों ने एक स्वर में कहा है कि असम की जनता को असम समझौते का अक्षरशः क्रियान्वयन चाहिए न कि उच्च स्तरीय समिति। केएमएसएस सलाहकार अखिल गोगोई ने संगठन के मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ राज्य में तेज होते आंदोलन को दबाने के लिए यह केंद्र सरकार की एक चाल है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का सिर्फ 3-4 महीने का कार्यकाल बचा रह गया है और अब केंद्र सरकार के पास करने को न तो कुछ खास बचा है और न ही वक्त है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1998  में ही एक नौ सदस्यीय त्रिपक्षीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में आसू के प्रतिनिधि के तौर पर वर्तमान मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, आसू सलाहकार डा.समुज्जवल कुमार भट्टाचार्या और विधायक सत्यब्रत बतौर सदस्य शामिल थे। उन्होंने  कहा कि संविधान की 371 बी धारा के तहत असम का प्राप्त अधिकारों में यदि 371 जी और 371 ए को जोड़ दिया जाए तो सारी समस्याओं का स्वतः समाधान हो जाएगा।

कृषक नेताओं ने कहा केंंद्र सरकार उच्च समिति गठन के नाम पर राज्यवासियों का ध्यान नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर से भटकाना चाहती है। केंद्र सरकार की नीयत में खोट है और वह एक बार अपने चुनावी फायदे के लिए असमवासियों को ठगना चाहती है।