असम में जारी एनआरसी के बाद 40 लाख लोगों के सामने खुद को भारतीय नागरिक साबित करने की चुनौती है। खास तौर दूसरे राज्यों से सालों पहले असम में आकर बसे परिवारों के लिए यह परीक्षा की घड़ी है। एनआरसी के जारी हुए ड्राफ्ट में 73 हजार ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं, जो कि सालों पहले बिहार से आकर असम में बस गए थे। अब ये लोग सरकारी अधिकारियों के सामने भारतीय नागरिक होने का पुख्ता सबूत नहीं दे पाए। असम सरकार ने उनके दस्तावेजों को सत्यापन के लिए बिहार सरकार के पास भेजा है।

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि असम में रहने वाले 73 हजार बिहार के मूल वासियों ने अपने सारे प्रमाण पत्रों को सत्यापित कराने के लिए बिहार सरकार के पास भेजा है। सरकार की तरफ से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वो जल्द से जल्द अभियान चला कर दस्तावेजों को सत्यापित कराएं ताकि किसी बिहारी को असम में कठिनाईयों का सामना नहीं करना पड़े।

इन दस्तावेजों में जाति, जन्म, आधार, मतदाता सूची, मतदाता पहचान पत्र, शैक्षणिक योग्यता से जुड़े प्रमाण पत्र, भू-अभिलेख, ड्राइविंग लाइसेंस संबंधित प्रमाण पत्र शामिल हैं। दरअसल असम में 1951 के बाद पहली बार नागरिक पंजी का निर्माण असम समझौते के तहत सर्वोच्च न्यायालय की देख रेख में चल रहा है, जिसमें असम में रहने वाले भारतीय नागरिकों को सूचीबद्ध किया जा सके, जिनका नाम पंजी में शामिल नहीं है उन्हें विदेशी नागरिक माना जाएगा। इस मामले में डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने सभी जिलों डीएम का को निर्देश दिया हैं कि दूसरे राज्यों से आने सत्यापन पत्र को जल्द निष्पादित किया जाए।