केन्द्र सरकार ने असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को अंतिम रूप देने की तिथि आगामी 31 दिसम्बर तय की है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को एक अधिसूचना जारी कर इस तिथि का ऐलान किया। इसके तहत असम के नागरिक रजिस्टर 1951 को अद्यतन किया जा रहा है। इससे पहले यह काम 31 जुलाई तक पूरा किया जाना था। इससे पहले भी यह अवधि कई बार बढ़ायी गई है। उल्लेखनीय है कि इस रजिस्टर की मसौदा सूची सोमवार को जारी की गयी, जिसमें करीब 40 लाख लोगों के नाम नहीं है,  जिसे लेकर संसद में भी काफी हंगामा हुआ। इसके बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा कि यह मसौदा सूची है और जिनके नाम इसमें शामिल नहीं किये जा सके हैं उन लोगों को न्यायाधिकरण के समक्ष आपत्ति और दावे दर्ज कराने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में पूरी निष्पक्षता बरती जा रही है और लोगों को किसी भी तरह के भ्रम से बचना चाहिए।

बता दें कि अंतिम मसौदे को जारी करने के बाद मीडिया से बात करते हुये भारत के रजिस्ट्रार जनरल शैलेष ने कहा कि एनआरसी के अंतिम मसौदे के प्रकाशन को पूरा करना हमारे लिए ऐतिहासिक पल है। उन्होंने यह भी कहा यह सिर्फ अंतिम मसौदा है और सभी दावों और आपत्ति के समाधान के बाद ही समग्र एनआरसी प्रकाशित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम इसमें नहीं है वो 30 अगस्त से 28 सितंबर के बीच आवेदन कर सकते हैं, जिन लोगों के नाम छूट गये हैं वे सात अगस्त से एनआरसी सेवा केंद्रों और स्थानीय रजिस्ट्रार से नाम छूटने की वजह जान सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो कोई इससे संतुष्ट नहीं है वे विदेशी नागरिक प्राधिकरण के समक्ष दावा और आपत्ति दर्ज करवा सकता है। 

राज्य एनआरसी के मुख्य समन्वयक प्रतीक हाजेला ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, अंतिम मसौदे में चार श्रेणियों के नाम छोड़ दिए गए हैं। इनमें भारत के निर्वाचन आयोग और जिन व्यक्तियों के मामले प्राधिकरण के समक्ष लंबित हैं, उन्हें संदिग्ध मतदाताओं के तौर पर चिह्नित किया गया है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च अदालत के दिशा निर्देशानुसार जिला मजिस्ट्रेट की जांच व्यवस्था को अपनाया गया है। स्थानीय जांच के बाद, यदि कोई व्यक्ति वैध नागरिक पाया जाता है तो उसका नाम अंतिम मसौदे में शामिल किया गया है। 

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वोत्तर), सत्येंद्र गर्ग ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम अंतिम मसौदे में नहीं है तो उसे विदेशी नहीं माना जायेगा। उन्होंने कहा कि एनआरसी में नाम नहीं होने पर ऐसे मामलों को प्राधिकरण के समक्ष भेजने अथवा इन लोगों को हिरासत शिविर में भेजने का सवाल ही नहीं है। सरकार कानून और व्यवस्था को बनाये रखने के लिए प्रतिबद्ध है और इस उद्देश्य के लिए केंद्र राज्य सरकार को पर्याप्त सहायता दे रहा है। असम के लिए एनआरसी को अद्यतन करने की प्रक्रिया 24 मार्च 1971 की मध्यरात्रि को अंतिम तारीख मानते हुए सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में 2013 में शुरू हुई थी, और इस पर आने वाला अनुमानित खर्च 1,220 करोड़ रुपये है। एनआरसी आवेदन पत्रों की प्राप्ति की प्रक्रिया मई 2015 के अंत में शुरू हुई और उसी वर्ष 31 अगस्त को समाप्त हो गई। 31 दिसंबर, 2017 की मध्यरात्रि 1.90 करोड़ आवेदकों के नाम के साथ पहला मसौदा जारी किया गया।