जमात-ए-इस्लामी हिंद ने नागरिकता (संसोधन) विधेयक 2016 को अत्यधिक भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए इसे हिंदुओं को देश की नागरिकता देने वाला विधेयक बताया। संगठन ने इसे अनुचित करार देते हुए विधेयक को वापस लेने की मांग की है। जबकि संगठन ने असम में चल रही एनआरसी अद्यतन प्रक्रिया को देश के नागरिकों को विदेशी करार देने वाली प्रक्रिया बताया है। 

जमात के जामिया नगर स्थित दिल्ली कार्यालय में हुए पत्रकार सम्मेलन में जमात के महासचिव मोहम्मद सलीम अभियंता ने कहा कि यह विधेयक भारत के संविधान की भावना के खिलाफ भेदभावपूर्ण है क्योंकि यह बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए लोगों को उनके धर्म के अनुसार नागरिकता प्रदान करने का प्रस्ताव करता है। इस प्रकार बांग्लादेश से हिंदुओं को स्वीकार किया जाएगा, लेकिन मुस्लिमों को नहीं। यह अनुचित है और इसे वापस लेना चाहिए। वहीं असम में चल रही एनआरसी अद्यतन प्रक्रिया पर भी जमात ने सवाल उठाए।

एनआरसी के मुद्दे पर जमात के मुखिया मौलाना सैयद जलालुद्दीन ने कहा कि हम असम में नागरिकता  राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) के प्रकाशन से चिंतित हैं। इस प्रकार एनआरसी ने 3.3 करोड़ आवेदनों में से 1.9 करोड़ लोगों को भारत का वैध नागरिक माना है, लेकन 1.4 करोड़ लोगों का भाग्य अभी भी अधर में लटका हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति पर विदेशी होने का आरोप है तो आरोपी को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए सबूत देना होता है, लेकिन जो देश के वास्तविक नागरिक हैं और वे गरीब होने की वजह से उचित रिकॉर्ड बनाए नहीं रख सकते हैं। ऐसे लोग प्रभावित हुए हैं। सरकार पर देश के नागरिकों को विदेशी साबित करने का आरोप लगाते हुए संगठन ने कहा कि अब देश के नागरिकों को विदेशी भगोड़ा होने का सामना करना पड़ रहा है।