असम एनआरसी समन्वयक प्रतीक हजेला ने दावा आैर आपत्ती प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि असमिया पहचान साबित करने के जिए जरूरी दस्तावेजों की संख्या में कटौती की जाए। जिसे लेकर राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी आैर विपक्ष ने प्रतीक हाजेला की आलोचना की है। 


शीर्ष अदालत ने 5 सितंबर को एनआरसी के लिए दावे और आपत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया को शुरू करने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। इस सुझाव पर केंद्र का जवाब मांगा गया था कि पहचान साबित करने के लिए दावाकर्ताओं द्वारा 10 में से कोई भी एक दस्तावेज इस्तेमाल किया जा सकता है। असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत साइकिया ने शीर्ष अदालत को दावों और आपत्तियों के संबंध में 1951 एनआरसी और 1971 से पहले की मतदाता सूची में छूट के सुझाव पर हाजेला को पद से हटाने की मांग भी की है।

उधर, सत्ताधारी भाजपा की प्रदेश इकाई के महासचिव दिलीप सैकिया ने एनआरसी प्रदेश समन्वयक के सुझाव की आलोचना करते हुए दावा किया कि इसने ऐसे समय स्थिति को जटिल बना दिया है। जब लाखों भारतीय गोरखा, बंगाली, हिंदी भाषी और कई अन्य समुदायों के लोगों के नाम एनआरसी मसौदे में शामिल नहीं हैं।


बता दें कि असम में 30 जुलाई 2018 को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का अंतिम ड्रॉफ्ट जारी कर दिया गया।  इसमें शामिल होने के लिए असम में 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें से 40.07 लाख आवेदकों को जगह नहीं मिली। असम एनआरसी का पहला ड्राफ्ट 31 दिसंबर 2017 को जारी हुआ था।