असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजीयन (एनआरसी) के पहले प्रारूप का रविवार के मध्यरात्रि प्रकाशन हुआ। इसमें राज्य के 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था। पहले प्रारूप में 1.90 लोगों के नाम शामिल हुए। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया शैलेश आैर एनआरसी के राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला ने इसे जारी करते हुए कहा कि जिनके नाम नहीं आए है, उन्हें चिंतित होने की कोर्इ जरूरत नहीं है।

केंद्र आैर राज्य सरकार को आशंका थी कि प्रकाशन के बाद स्थिति बिगड़ सकती है, इसलिए 88 सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियां तैनात की थी। सुबह से ही लोग एनआरसी केंद्रों पर नाम देखने के लिए पहुंच गए थे।


2 सांसद आैर 9 विधायक के नाम नहीं

एनआरसी के पहले पा्ररूप में धुबड़ी सांसद बदरूद्दीन अजमल, उनके छोटे भार्इ बरपेटा सांसद सिराजुद्दीन अजमल का नाम नहीं है। इसके अलावा नौ विधायकों के नाम भी इसमे शामिल नहीं है। भाजपा विधायक शिलादित्य, अश्विनी राय सरकार, कांग्रेस के नुरूल हुदा, शुकुर अली, शेरमान अली अहमद, एआर्इयूडीएफ के अनंत कुमार मालो,  अमिनुल इस्लाम, हाफिज बशीर, अहमद कासमी आैर अब्दुल रहीम अजमल का नाम नहीं है।

आसू के सलाहकार डाॅ.समुज्जवल भटयाचार्य के घर के एक सदस्य को नाम भी नहीं है। जबकि प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन उल्फा स्वाधीन के सेना प्रमुख परेश बरूवा को नाम शामिल है। वे लंबे समय से देश से बाहर है । परिवार के जमा कराये कागजात पर उनका नाम शामिल है।


बता दें कि राज्य की सभी पार्टियां लोगों से आशंकित न होने की अपील कर रही है, यही वजह है कि असम का महौल ठीक रहा। एनआरसी कार्य कांग्रेस के दिनों शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट की देख रेख में प्रकाशित पहले प्ररूप के प्रकाशन को श्रेय भाजपा लेना चाहेगी।