कोरोना महामारी के बीच ब्लैक फंगस ने सभी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब इसी के साथ व्हाइट फंगस भी नया संकट बनकर सामने खड़ा है। हाल ही में पटना में इसके दो मामले मिले हैं। व्हाइट फंगस इसलिए भी बड़ा खतरा है, क्योंकि यह शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के अनुसार व्हाइट फंगस को चिकित्सकीय भाषा में कैंडिडा कहते हैं। ये फंगस फेफड़ों के साथ रक्त में घुसने की क्षमता रखता है। रक्त में पहुंचने पर इसे कैंडिडिमिया कहते हैं।

यह फंगस इसलिए अधिक खतरनाक है क्योंकि यह शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है। फेफड़ों तक पहुंचे, तो लंग बॉल कहते हैं। सीटी स्कैन जांच में फेफड़ों के भीतर यह गोल-गोल दिखाई देता है। गौरतलब है कि कोरोना से सर्वाधिक नुकसान फेफड़ों को हो रहा है। व्हाइट फंगस भी फेफड़ों पर हमला करता है। अगर कोरोना मरीजों में इसकी पुष्टि हुई, तो जान को खतरा बढ़ सकता है। यह फंगस त्वचा, नाखून, मुंह के भीतरी हिस्से, आमाशय, किडनी, आंत व मस्तिष्क को भी चपेट में ले सकता है। मरीज की मौत ऑर्गन फेल होने से हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि जो मरीज ऑक्सीजन पर हैं, उनके उपकरण जीवाणु मुक्त हों और जो ऑक्सीजन फेफड़े में जाए वह फंगस से मुक्त हो।

इसलिए है ब्लैक फंगस से अलग

- व्हाइट फंगस अगर जोड़ों तक पहुंच गया तो आर्थराइटिस जैसी तकलीफ महसूस होगी। 

- यह मस्तिष्क तक पहुंचा तो सोचने विचारने की क्षमता पर असर डालती है। पीडि़त को सिर में दर्द या अचानक दौरा आने लगते हैं।

- त्वचा पर छोटा और दर्द रहित गोल फोड़ा जो संक्रमण की चपेट में आने के एक से दो सप्ताह में हो सकता है।

- व्हाइट फंगस फेफड़ों में पहुंच गया तो खांसी, सांस में दिक्कत, सीने में दर्द और बुखार भी हो सकता है।