सर्वोच्च न्यायालय के निजी कर्मचारियों को मिलने वाली पेंशन में बदलाव करने से लोगों की पेंशन में काफी इजाफा हो जाएगा। हालांकि इस फैसले से जहां एक तरफ पेंशन की राशि बढ़ जाएगी, वहीं दूसरी तरफ आपकी टेक होम सैलरी और पीएफ फंड पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। वर्तमान में कर्मचारियों को बेसिक वेतन के आधार पर और कर्मचारी पेंशन योजना के तहत अधिकतम 7500 रुपये प्रति महीना पेंशन मिलती है। अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि कर्मचारियों को उनके आखिरी वेतन के आधार पर पेंशन मिलेगी।


मौजूदा सिस्टम के मुताबिक वेतन का 8.33 भाग पेंशन के रूप में दिया जाता था। लेकिन अब आदेश के बाद पेंशन की गणना पूरे वेतन यानी, बेसिक वेतन, डीए और रिटेंशन बोनस के आधार पर की जाएगी। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की सैलरी 60 हजार रुपये प्रति महीना है और उसने 35 वर्ष काम किया है तो अब उसे रिटायरमेंट के बाद हर माह करीब 30 हजार रुपये पेंशन के रूप में मिलेंगे, जबकि पुराने सिस्टम के तहत यह पेंशन सिर्फ 7500 रुपये होती थी। इसके साथ ही अगर आपका वेतन 30 हजार रुपये है और आपने 35 वर्षों तक काम किया है तो आपको 15 हजार रुपये की पेंशन मिलेगी।


बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एक अप्रैल 2019 को ईपीएफओ की एसएलपी पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुरेंद्र मोहन और न्यायमूर्ति एएम बाबू कती खंडपीठ ने ये फैसला सुनाया था। खंडपीठ ने कहा था कि 15 हज़ार मासिक का मतलब होता है 500 रुपये प्रतिदिन। यह सामान्य ज्ञान है कि एक दिहाड़ी मजदूर को भी इससे ज्यादा धनराशि का भुगतान होता है। इसलिए पेंशन के लिए अधिकतम वेतन 15 हजार रुपये तक सीमित करना एक सभ्य पेंशन से अधिकांश कर्मचारियों को वृद्धावस्था में वंचित करेगा।


बता दें कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने कर्मचारियों की पेंशन के लिए उनकी अधिकतम सैलरी 15 हजार रुपये तय की थी। इसका मतलब, आपकी सैलरी भले ही 15 हजार रुपये प्रति महीने से अधिक हो, मगर आपकी पेंशन की गणना अधिकतम 15 हजार रुपये सैलरी पर ही होगी। सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की ओर से निर्धारित इस सैलरी सीमा को तोड़ दिया है। अब कर्मचारियों के पेंशन की गणना आकिरी सैलरी यानी उच्चतम सैलरी के आधार पर होगी। कोर्ट के इस फैसले से कर्मचारियों को कई गुणा ज्यादा पेंशन मिलेगी।