उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला देते हुए शिवलिंग को क्षरण से बचाव के लिए आदेश दिया जारी किया है । अदालत ने कहा है कि मंदिर के शिवलिंग पर कोई भी भक्त पंचामृत नहीं चढ़ाएगा, बल्कि वह शुद्ध दूध से पूजा की जाएगी। 

अदालत ने मंदिर कमिटी से कहा है कि वह भक्तों के लिए शुद्ध दूध का इंतजाम करेंगे और ये सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी अशुद्ध दूध शिवलिंग पर न चढ़ाएं। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के शिवलिंग के संरक्षण के लिए तमाम आदेश पारित किए हैं। 

जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर मामले में फैसला सुनाया। जस्टिस अरुण मिश्रा ने अपने कार्यकाल के आखिर में ये फैसला सुनाया। फैसला सुनाते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव की कृपा से ये आखिरी फैसला भी हो गया।

सुप्रीम कोर्ट ने शिवलिंग को क्षरण से बचाने के लिए कोई भी भक्त शिवलिंग पर किसी भी पंचामृत आदि से लेप न करें। भस्म आरती को बेहतर किया जाए ताकि पीएच वैल्यू सही हो और शिवलिंग संरक्षित रहेें। इसके लिए बेहतर से बेहतर तरीका अपनाया जाए। शिवलिंग पर मुंडमाल का भार कम किया जाए। इस बात पर विचार किया जाए कि क्या मेटल वाला मुंडमाल अनिवार्य है।

अदालत ने कहा कि दही, घी और मधु लेपने (रब) करने के कारण शिविलिंग का घिसाव व क्षरण हो रहा है। ये सही होगा कि सीमित मात्रा में शुद्ध दूध शिवलिंग पर चढ़ाया जाए। परंपरागत पूजा सिर्फ शुद्ध वस्तुओं से होती रही है। पुजारी व पंडित इस बात को सुनिश्चित करें कि कोई भी भक्त शिवलिंग को किसी भी हाल में न लेपें। 

अगर कोई भी भक्त ऐसा करता पाया जाता है तो पुजारी की जिम्मेदारी होगी। कोई भी भक्त शिवलिंग को लेपेगा या मलेगा नहीं बल्कि मंदिर द्वारा परंपरागत पूजा होगी। गर्भगृह में पूजा स्थल की 24 घंटे रेकॉर्डिंग की जाएगी और छह महीने तक रेकॉर्डिंग को संरक्षित किया जाएगा।

 कोई भी पुजारी इस मामले में आदेश का उल्लंघन करते हैं तो मंदिर कमिटी एक्शन ले सकती है। कोई भी भक्त पंचामृत नहीं चढ़ाएंगे बल्कि मंदिर द्वारा परंपरागत पूजा में इसका इस्तेमाल हो सकता है। मंदिर कमिटी शुद्ध दूध का अपने श्रोत से इंतजाम करेंगे, ताकि वह दूध भक्त शिवलिंग पर चढ़ाएं और कमिटी सुनिश्चित करे कि अशुद्ध दूध शिवलिंग पर न चढ़ाया जाए।