अब PF पर ज्यादा ब्याज मिलेगा जिसकी वजह से 5000 रूपए तक EPS पेंशन हो सकती है। PF पर ज्यादा ब्याज दिलाने और EPS पर ज्यादा रिटर्न दिलाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) जल्द ही इससे जुड़े अहम फैसले ले सकता है। संसदीय समिति ने इसके लिए लेबर पैनल गठित किया है, जो इस पर काम करेगा. इस हफ्ते लेबर पैनल की अहम बैठक होने वाली है। बैठक में पैनल EPFO के तहत 10 खरब रुपए के कोष का प्रबंधन, प्रदर्शन और निवेश पर मंथन करेगा। पैनल का गठन पिछले महीने ही किया गया था।

EPFO को संगठित और असंगठित सेक्टर में काम करने वालों के लिए ज्यादा फायदेमंद कैसे बनाया जाए, इस पर भी पैनल विचार करेगा। काफी समय से EPFO के कोष को फंड मैनेजर देख रहे हैं। साथ ही इसके निवेश से जुड़े फैसले भी वही करते हैं। ऐसे में यह पैनल इसका आकलन करेगा। पैनल के सदस्य कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते EPFO कोष पर पड़ने वाले प्रभाव का भी आकलन करेगा।

केंद्र सरकार का मकसद असंगठित श्रमिकों को बुढ़ापे की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना (PM-SYM) के जरिए रिक्शा चालक, स्ट्रीट वेंडर, हेड लोडर, ईंट भट्ठा मजदूर, कोबलर, चीर बीनने वाले, घरेलू कामगार, कृषि निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाना है। EPFO पहले केवल संगठित क्षेत्र के लिए था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसमें असंगठित क्षेत्र को भी शामिल कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, PF कोष के लिए गठित पैनल की बुधवार को होने वाली बैठक में कर्मचारियों की पेंशन योजना (EPS) के तहत पेंशन बढ़ाने और खाताधारक की मृत्यु के मामले में परिवारों को मिलने वाली राशि की उपलब्धता सुनिश्चत करने पर भी चर्चा होगी। EPS योजना के तहत न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 5,000 रुपए मासिक भुगतान करने पर भी विचार होगा। कई ट्रेड यूनियन और श्रमिक संगठन भी पिछले कुछ समय से पेंशन की राशि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

EPF कोष पर पैनल कई बैठकों में इस मुद्दे पर चर्चा करेगी और अपनी विस्तृत रिपोर्ट संसद को शीतकालीन सत्र में सौपेंगी। पैनल के सदस्यों ने श्रम मंत्रालय के प्रतिनिधियों को दूसरे देशों में संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए किए गए प्रावधानों का भी ब्योरा दिया है।

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) पर वर्ष 2019-20 के लिए 8.5 प्रतिशत ब्याज तय किया है। यह पिछले पांच वित्तीय वर्षों में सबसे कम है। ऐसे में इसे भी बढ़ाने की तैयारी है। अगर पैनल अपनी रिपोर्ट में ज्यादा रिटर्न दिलाने वाली जगह पर निवेश करता है तो इसका फायदा आपको भी मिलेगा। अगले वित्तीय वर्ष में ज्यादा ब्याज दिलाना भी पैनल की जिम्मेदारी होगी। वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए ब्याज दर दिसंबर अंत या जनवरी में तय होगी। उससे पहले पैनल की सिफारिशों के आधार पर इसे तय किया जा सकता है।