केंद्र सरकार ने चेक बाउंस के मामलों को लेकर एक बड़ा सख्त कदम उठाया है। इसके लिए सरकार ने एक अहम बिल लोकसभा में पास किया है। ध्वनिमत से पारित हुए इस बिल में चेक बाउंस होने पर भारी-भरकम मुआवजा दिए जाने का प्रावधान किया गया है।


लोकसभा में नेगोशिएबल इंस्ट्रमेंट्स (अमेंडमेंट) बिल लाया गया। यह बिल ध्वनिमत से पारित हुआ। संसद की तरफ से अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो चेक बाउंस के मामलों में कई चीजें बदल जाएंगी। लेकिन इस तरह के मामलों में अपील करने का प्रावधान होने के कारण लंबित मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे चेक की विश्वसनीयता कम हो रही है और प्रोब्लेम्स बढ़ रही हैं।


क्या होगा नियम-
नए प्रावधानों के तहत शिकायत करने वाले को त्वरित न्याय मिलेगा। मामले की शिकायत करने वाले के लिए 20 प्रतिशत अंतरिम राशि मुआवजे के रूप में देने का प्रावधान किया गया है।


यदि मामला अपीलय अदालत में जाता है तो 20 प्रतिशत और राशि न्यायालय में जमा करनी होगी। चेक जारी करने वाले को 20 प्रतिशत दंड पर ब्याज भी देना पड़ेगा।

मामले में न्यायालय चाहे तो दंड की राशि 100 प्रतिशत भी कर सकता है। वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि चेक के अनादर पर समय-समय पर सरकार को विभिन्न पक्षों की ओर से ज्ञापन प्राप्त हुए हैं।


विधेयक के जरिए अधिनियम में धारा 143 (क) का समावेशन किया गया है जिसमें अपील करने वाले पक्ष को ब्याज देने का प्रावधान है।

धारा 138 के तहत अदालत में मुकदमा चलने पर पीड़ित पक्ष को 60 दिन के भीतर 20 प्रतिशत अंतरिम राशि देने की व्यवस्था है।


बड़ी राशि होने और दो किस्तों में भुगतान करने की दशा में यह अवधि 30 दिन बढ़ाई जा सकती है।

इसी प्रकार में धारा 148 में संशोधन करके अदालत को चेक जारी करने वाले पर जुर्माना लगाने का अधिकार दिया गया है।