कुमारप्पा राष्ट्रीय हाथ कागज संस्थान जो कि खादी और ग्रामोद्योग आयोग की ही एक इकाई है, ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष की निरन्तर प्रेरणा से संस्थान ने अपने विकास एवं शोध की कडी में अपने उद्देष्यों की पूर्ति हेतु गाय के गोबर से तैयार एक नये उत्पाद “AntibacterialCloth Treated with Extracted Antibacterial Agent from Cow Dung”  का निर्माण किया है, जिसका विधिवत उदघाटन  दिनांक 26.11.2021 को श्री नारायण राणे, केन्द्रीय मंत्री, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उनके दो दिवसीय जयपुर दौरे के दौरान खादी और ग्रामोद्योग आयोग के माननीय अध्यक्ष श्री विनय कुमार सक्सेना, खादी और ग्रामोद्योग आयोग के  माननीय सदस्य (उत्तर क्षे़त्र) श्री बसन्त तथा खादी और ग्रामोद्योग आयोग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी व कुमारप्पा राष्ट्रीय हाथ कागज संस्थान की उपाध्यक्ष श्रीमती प्रीता वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। 

देश के यषस्वी व लोकप्रिय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के Local for Vocal  के आहवान और उनके इस vision को सार्थक बनाने के प्रयास में भारत में सर्वप्रथम गाय के गोबर का उपयोग करते हुये Eco-friendly खादी प्राकृतिक पेन्ट का अविष्कार कुमारप्प्पा राष्ट्रीय हाथ कागज संस्थान में किया गया। खादी प्राकृतिक पेन्ट का विधिवत प्रक्षेपण तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री, एमएसएमई भारत सरकार द्वारा 12 जनवरी 2021 को नई दिल्ली में एक समारोह में किया गया। 

खादी प्राकृतिक पेन्ट के उत्पादन में 25 से 30 प्रतिषत गाय का गोबर उपयोग में लिया जाता है। खादी प्राकृतिक पेन्ट Eco-friendly,non fungal o antibacterial गुण्वत्ता लिये हुये है।  खादी प्राकृतिक पेन्ट Distemper o Plastic Emulsion  के रुप में उपलब्ध है तथा देष की जानी मानी कम्पनियों के पेंट से सस्ता भी है। 

माननीय मंत्री महोदय के निर्देष पर कुमारप्प्पा राष्ट्रीय हाथ कागज संस्थान में इसके व्यवसायिक स्तर पर उत्पादन एवं गाय के गोबर से पेन्ट उत्पादन हेतु प्रषिक्षण की भी व्यवस्था की गई। खादी प्राकृतिक पेन्ट के निर्माण हेतु 05 दिवसीय प्रषिक्षण का प्रथम बैच 18 जनवरी 2021 को कुमारप्प्पा राष्ट्रीय हाथ कागज संस्थान में प्रारम्भ कर दिया गया और अब तक लगभग 900 भावी उद्यमियों को पेन्ट निर्माण का प्रषिक्षण दिया जा चुका है।

कुमारप्पा राष्ट्रीय हाथ कागज संस्थान द्वारा खादी प्राकृतिक पेन्ट का व्यवसायिक स्तर पर उत्पादन यहां वर्तमान में स्थापित नवीन स्वचालित प्लांट पर किया जा रहा है और इसकी बिक्री हेतु देष भर में डीलर भी नियृक्त किये हैं। संस्थान द्वारा अभी तक लगभग 20 हजार लीटर खादी प्राकृतिक पेन्ट का उत्पादन किया गया है। संस्थान ने इसकी राष्ट्रीय स्तर पर बिक्री हेतु अब तक कुल 16 डीलर्स भी चयनित किये हैं। 

खादी प्राकृतिक पेन्ट की मंाग को देखते हुये संस्थान द्वारा 30 Technology Transfer  हेतु समझौते किये गये हैं और खादी प्राकृतिक पेन्ट के उत्पादन हेतु 6 उत्पादन इकाइयाँ भी स्थापित हो चुकी हैं, जिनमें खादी प्राकृतिक पेंट का उत्पादन कार्य प्रारम्भ हो गया है। संस्थान को खादी प्राकृतिक पेंट की बिक्री, ट्रेनिंग, डीलरषिप व Technology Transfer  से लगभग 1.10 करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय हुई है। 

खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने वैष्विक महामारी कोविड -19 के इस कठिन दौर में ग्रामीणों की जीविका उपार्जन हेतु रोजगार के अवसर प्रदान करने एवं उनकी आय में वृद्धि हेतु एक अनूठा प्रयास किया है। 

हाल ही में दिनंाक 21 नवम्बर, 2021 को माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ की उपस्थिति में रायपुर, छत्तीसगढ़ में गाय के गोबर से निर्मित खादी प्राकृतिक पेंट के निर्माण की तकनीक हस्तातंरण हेतु कुमारप्पा राष्ट्रीय हाथ कागज संस्थान व छत्तीसगढ़ शासन के बीच एक समझौता ज्ञापन (डवन्) हस्ताक्षरित हुआ है। 

वर्ष 2018 में खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष श्री विनय कुमार सक्सेना जी ने जयपुर के उपनगरीय क्षेत्रों में पाॅलीथीन के विषाल भण्डारों को देखते हुये कुमारप्पा राष्ट्रीय हाथ कागज संस्थान के अधिकारियों और वैज्ञानिकों को इस प्लास्टिक कचरे को कागज की लुगदी में मिश्रित कर हाथ कागज बनाने हेतु प्रेरित किया। उनकी इसी प्रेरणा से ही संस्थान द्वारा स्वच्छ भारत अभियान में सक्रिय भागीदारी के प्रति वचनबद्धता की दृष्टि से एक बहुत ही नवीन विधि का निर्माण किया है जिसके अंतर्गत समसामाहिक प्लास्टिक कचरे की समस्या का समाधान एक नई पहल को रिप्लाॅन (REPLAN– Reducing PLAstic in Nature)  के अंतर्गत प्लास्टिक कचरे के मिश्रण से हाथ कागज के कैरी बैग का निर्माण संस्थान द्वारा किया गया। इस कागज में 20 प्रतिषत तक कागज की लुगदी के साथ प्लास्टिक कचरे का उपयोग किया गया।

(REPLAN – Reducing PLAstic in Nature) परियोजना के अंतर्गत संस्थान द्वारा अब तक लगभग 14 लाख कैरी बैग का निर्माण किया गया, जिसमें लगभग 35 टन प्लास्टिक के कचरे का उपयोग किया गया। संस्थान को प्लास्टिक कचरे से मिश्रित कर बनाएं गये कैरी बैग से लगभग 1.40 करोड़ की आय अर्जित हुई है।