एड्स के मरीजों का इलाज सुनिश्चित करने तथा उनके साथ भेदभाव को कानूनन अपराध बनाने के प्रावधान वाले विधेयक को मंगलवार को संसद की मंजूरी मिल गई।

लोकसभा ने एचआईवी विषाणु एवं लक्षणग्रस्तता (निवारण एवं नियंत्रण )विधेयक 2017 को ध्वनिमत से पारित कर दिया जबकि राज्यसभा इसे पहले ही अपनी मंजूरी दे चुकी है। 

विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि सरकार एचआईवी संक्रमित मरीजों का मुफ्त इलाज करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए मरीज का ऐंटी रेट्रोवायरस एआरटी केंद्र में पंजीकृत होना जरूरी है और आधार कार्ड की कोई अनिवार्यता नहीं है। 

नड्डा ने कहा कि एड्स के मरीजों के साथ नौकरी, संपत्ति और अन्य स्थानों पर भेदभाव अब कानूनन अपराध होगा। इसके लिए दो माह से लेकर दो वर्ष तक की कैद और एक लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। 

अभी तक इसके लिए सिर्फ दिशानिर्देश ही थे। विधेयक में वित्त पोषण की व्यवस्था न होने से सम्बन्धी सदस्यों की चिंता को दूर करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष एआरटी के लिए 2000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था जो अब तक की सबसे बडी राशि है। 

एचआईवी संक्रमित एवं एड्स मरीजों के शिकायतों का निवारण करने वाली संस्था में सदस्यों की संख्या और स्थान आदि का फैसला राज्य सरकारें करेंगी। इसका आदेश प्रशासन को मानना पडे़गा।