चीन ने अपने विस्तारवादी एजेंडे के साथ आगे बढ़ते हुए अब भारत के पारंपरिक सहयोगी भूटान के साथ एक नया सीमा विवाद खड़ा कर दिया है। चीन ने जून के पहले सप्ताह में ग्लोबल एनवायरमेंट फैसिलिटी (जीईएफ) की 58वीं वर्चुअल बैठक में भूटान के सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य (एसडब्ल्यूएस) की जमीन को विवादित बताया है। इसके साथ ही चीन ने इस परियोजना के लिए होने वाली फंडिंग का भी विरोध किया। गौरतबल है कि ड्रैगन पूर्वी चीन सागर, दक्षिण चीन सागर और भारत के अरुणाचल प्रदेश व लद्दाख में यथास्थिति बदलने के प्रयासों में लगा हुआ है।

स्ट्रैट न्यूज ग्लोबल के अनुसार जीईएफ काउंसिल दुनिया भर में विभिन्न पर्यावरणीय परियोजनाओं के लिए फंडिंग का फैसला करने के लिए  इकट्ठा हुई थी। वह भी चीन की इस आपत्ति से चौंक गई। जीईएफ परिषद के अधिकांश सदस्यों ने भूटान के विचार का समर्थन किया। चीनी परिषद के सदस्य की आपत्ति के बावजूद कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया था। परिषद ने आपत्ति के लिए चीन के कारण को दर्ज करने से इनकार कर दिया। उसने यह कहा कि फुटनोट केवल यह रिकॉर्ड करेगा कि चीन ने परियोजना पर आपत्ति जताई। हालांकि, चीनी काउंसिल के सदस्य ने कहा कि उन्हें इस मामले पर विचार करने के लिए अपने उच्च अधिकारियों के साथ परामर्श करने के लिए समय की आवश्यकता होगी।

भूटान और चीन के बीच 1984 से सीमा विवाद है। थिम्पू और बीजिंग के बीच बातचीत विवाद के तीन क्षेत्रों को लेकर विवाद है। इनमें उत्तरी भूटान के जकार्लुंग और पसमलंग क्षेत्र तथा एक पश्चिम भूटान में सीमित है। सकतेंग तीन विवादित क्षेत्रों में से किसी का हिस्सा नहीं है।