दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत रामविलास पासवान के परिवार द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया। ये याचिका केंद्र के परिवार के सदस्यों को नई दिल्ली में 12 जनपथ बंगले से बेदखल करने के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जो उन्हें 1990 में आवंटित किया गया था।

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न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के संपदा निदेशालय द्वारा शुरू की गई बेदखली प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा, यह आपकी पार्टी का मुख्यालय नहीं है। बंगले पर वर्तमान में रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान रह रहे हैं, जो लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष और बिहार के जमुई से लोकसभा सांसद हैं। ये याचिका रामविलास पासवान की पत्नी रीना पासवान ने दायर की थी। अदालत के समक्ष यह तर्क दिया गया कि वर्तमान में कर्मचारियों सहित 100 से अधिक लोग हैं और परिवार को परिसर खाली करने के लिए चार महीने की जरूरत है।

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अदालत ने कहा कि प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई थी और अब इसे रोका नहीं जा सकता क्योंकि केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि बुधवार को पांच ट्रक माल परिसर से बाहर निकला है।  अदालत ने कहा कि अन्य लोग आवास की प्रतीक्षा कर रहे हैं और आदेश में कहा गया है कि परिवार 2020 से बेदखली के संबंध में नोटिस दिया गया था।