त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड विधानसभा चुनाव के परिणाम में कांग्रेस के प्रदर्शन में आई गिरावट के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी के पूर्वोत्तर प्रभारी सीपी जोशी ने बीजेपी के ईसाई चर्च को सहयोग देने का कार्ड खेला है। जोशी का आरोप है कि चुनाव के समय बीजेपी ने मेघालय के चर्च के लिए 70 करोड़ रुपए दिए, जिसकी स्टेट गवर्नमेंट ने मांग तक नहीं की थी। मेघालय के चर्च का प्रभाव चुनाव वाले तीन राज्यों की 70 फीसदी जनता पर है।

वहीं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों में कांग्रेस को मिली हार के चलते पार्टी अंदरूनी मनमुटाव शुरु हो गया है। अधिकांश बड़े नेताओं ने सीपी जोशी को हार के लिए जिम्मेदार माना है। नागालैंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने तो सीपी जोशी को नेगेटिव माइंड सेट का नेता बताते हुए यहां तक कह दिया है कि इनको जन भावनाओं और संवेदना की समझ तक नहीं है। इसी कारण उन्होंने कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले स्टेट में स्टार प्रचारकों को प्रचार करने तक से रोक दिया। कुछ ऐसे ही हमले त्रिपुरा और मेघालय में हो रहे हैं।

नगालैंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केवे खापे थेरी ने कांग्रेस की करारी हार का ठीकरा जोशी पर फोड़ा है। केवल नगालैंड ही नहीं पूरे पूर्वोत्तर में जोशी को हार का जिम्मेदार बता डाला। थेरी ने कहा कि जोशी ने सुनियोजित ढंग से न केवल नगालैंड में बल्कि पूरे पूर्वोत्तर में कांग्रेस को समाप्ति के कगार पर पहुंचा कर रख दिया है। पिछले दो साल से अधिक समय से न खुद नगालैंड आए और न राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को आने दिया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया है कि जोशी की नेगेटिव माइंड सेट के कारण स्टार प्रचार तो रोके ही गए, बल्कि पार्टी को चुनाव लडऩे के लिए फंड तक नहीं दिया गया। नगालैंड का असर मेघालय में भी हुआ और वहां अच्छी कंडीशन में होने के बावजूद पार्टी सत्ता से बाहर रहने की स्थिति में पहुंच गई है।


गौरतलब है कि जोशी पिछले साल जून में आरसीए (राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन) के प्रेसिडेंट चुने जाने के बाद से राजस्थान की राजनीति में भी बहुत कम सक्रिय है। हाल ही मांडलगढ़ विधानसभा और अलवर समेत अजमेर लोकसभा सीट पर उपचुनावों के दौरान भी जोशी की बेरुखी की कुछ जगह चर्चाएं रहीं।