उत्तरी कोरिया में महंगाई इन दिनों चरम पर है। हालात यह है कि एक किलो केले तीन हजार रुपए और एक शैम्पू की बोतल 14 हजार रुपए से ज्यादा की है। इसे देश के सर्वोच्च नेता किंग जोंग स्वीकार कर चुके हैं। अनाज की कमी के कारण यहां की स्थिति हाथ से निकलती हुई नजर आ रही है। हाल ही में यूनाइडेट नेशंस के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन ने कहा था कि नॉर्थ कोरिया में 860,000 टन अनाज की कमी है। इसे इस तरह समझ सकते हैं कि देश में दो महीने की आपूर्ति के बराबर ही अनाज बचा है।

रिडियो फ्री एशिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चिंताजनक हालात के बावजूद किम ने कहा है कि सीमाएं बंद रहेगी और महामारी के खिलाफ लागू नियम बरकरार रहेंगे। नॉर्थ कोरिया ने कोरोना महामारी को रोकने के लिए अपनी सीमाएं बंद कर दी हैं। नॉर्थ कोरिया जनता का पेट भरने के लिए आयात और चीन से मिलने वाली मदद पर निर्भर है, क्योंकि देश का अपना उत्पादन पर्याप्त नहीं है।

परमाणु कार्यक्रमों की वजह से नॉर्थ कोरिया पर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं। इस साल अप्रैल में किम ने आने वाले संकट को स्वीकार करते हुए अधिकारियों को आरडूअस मार्च के लिए तैयार रहने को कहा है। आरडूअस मार्च का इस्तेमाल नॉर्थ कोरिया में 1994 से 1998 के बीच हुए खाद्य संकट के लिए किया जाता है।

आंकड़ों से जानें

- ब्लैक टी के एक छोटे पैकेट की कीमत- करीब 5,167 रुपए

- कॉफी पैकेट की कीमत- करीब 7,381 रुपए

- 1 किलो केले की कीमत - करीब 3300 रुपए

- शैम्पू की बोतल- करीब 14800 रुपए