भारत को एक बिजली अधिशेष देश बताते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने कहा है कि देश में कोयले की कोई कमी नहीं है। वित्त मंत्री ने बिजली मंत्री आरके सिंह (Power Minister RK Singh) के बयान को रिकॉर्ड में याद करते हुए कहा कि यह बिल्कुल निराधार जानकारी है कि ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए कोयले या अन्य आवश्यक स्रोतों की कमी है जिससे देशों को बिजली की आपूर्ति बाधित होगी।



दो दिन पहले कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी (Coal Minister Prahlad Joshi) ने भी कहा था कि " कोल इंडिया (Coal India) के पास फिलहाल 22 दिनों का कोयला स्टॉक है और आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। मंत्री ने पूरे देश को भरोसा दिलाया कि जरूरत के मुताबिक कोयला उपलब्ध कराया जाएगा। हमें उम्मीद है कि मानसून खत्म होने के बाद कोयले की आपूर्ति में तेजी से सुधार होगा। 21 अक्टूबर के बाद हम 20 लाख टन कोयले की आपूर्ति करने का प्रयास करेंगे।"


कथित तौर पर, देश के 135 बिजली स्टेशनों (power stations) में से 115 कोयले की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं। देश के 70 बिजली संयंत्रों में चार दिन से भी कम का कोयला बचा है। भारत में बिजली उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों पर निर्भर है।

इस कमी के बाद विपक्षी दलों ने ही नहीं बल्कि इस क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भी कोयले की किल्लत को लेकर चिंता जाहिर की है। जानकारों का मानना ​​है कि अगर इस संकट का समाधान नहीं हुआ तो बिजली (power) से चलने वाले उद्योग को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।