दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को फरवरी में यहां हुई हिंसा के आरोपी शाहरुख पठान की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी जान को खतरा बताते हुए अदालत का रुख किया था। अदालत में सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने अदालत को बताया कि उसे सामान्य कैदियों के सेल में स्थानांतरित (शिफ्ट) नहीं किया जाएगा। पठान ने 25 जुलाई को अदालत से कहा था कि वह उच्च-जोखिम (हाई रिस्क) वाले कैदियों के साथ ही रहना चाहता है, क्योंकि उसके जीवन को खतरा है और अगर उसे सामान्य कैदियों के साथ स्थानांतरित किया गया तो किसी भी तरह की अप्रिय घटना हो सकती है।

उत्तर-पूर्व दिल्ली में हिंसा के दौरान पठान को एक पुलिसकर्मी पर बंदूक तानते हुए देखा गया था, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था। पठान द्वारा आवेदन दायर किया गया, जिसमें कहा गया कि जेल अधिकारियों द्वारा उसे मौखिक रूप से सूचित किया गया है कि उसे अब उच्च जोखिम वाले कैदियों के सेल से दूसरे स्थान पर सामान्य कैदियों के साथ स्थानांतरित किया जाएगा। जेल अधिकारियों ने कडकड़ड़ूमा अदालत के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट फहद उद्दीन से कहा कि अभियुक्त को स्थानांतरित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इसके बाद अदालत ने कहा, तिहाड़ में सेंट्रल जेल नंबर-4 के उप-अधीक्षक के जवाब को देखते हुए आगे की कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।

अदालत ने अधिवक्ता असगर खान, अब्दुल ताहिर खान और तारिक नासिर द्वारा दायर किए गए पठान के आवेदन को खारिज कर दिया। दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल दीपक दहिया पर पिस्तौल तानते हुए पठान का वीडियो क्लिप दिल्ली हिंसा के दौरान वायरल हुआ था। फरवरी महीने में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोधियों और इसके समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। इसी दौरान यह घटना देखने को मिली थी। उत्तर पूर्वी इलाके में काफी हिंसा हुई थी। दिल्ली पुलिस ने एक मई को मामले के संबंध में पठान, कलीम अहमद और इश्तियाक मलिक के खिलाफ 350 पन्नों का आरोप पत्र (चार्जशीट) दायर किया था। इस मामले में सबसे पहले तीन मार्च को शाहरुख को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे आश्रय देने वाले कलीम को जांच के बाद गिरफ्तार किया गया था।