अफगानिस्तान में तालिबान के लौटने के बाद आम जनता पाई पाई को मोहताज हो गई है। लोगों के पास खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं। देशभर में केंद्रीय बैंक, निजी बैंक और मनी एक्सचेंज मार्केट तक बंद पड़ी हैं। जिसके चलते सैकड़ों पुरुष और महिलाओं ने काबुल की सडक़ों पर उतर विरोध प्रदर्शन किया। पैसे की कमी के कारण इन लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 

प्रदर्शन करते हुए लोगों ने मांग की कि उन्हें उनका पैसा वापस चाहिए। लोग काबुल बैंक और निजी बैंकों के बाहर एकत्रित हुए लेकिन इन्हें इन्हीं का जमा किया हुआ पैसा नहीं मिला। अफगानिस्तान में इस्लामिक अमीरात की सरकार बनाने जा रहे तालिबान ने गुरुवार को सभी बैंक को शनिवार तक खोलने का आदेश दिया था और कहा कि सभी कार्यों को फिर से शुरू किया जाए। तालिबान के आदेश और सुरक्षा को लेकर दिए गए आश्वासन के बावजूद बैंक कर्मी काम पर नहीं लौटे और इसी वजह से बैंक बंद पड़े हैं। यहां दोबारा काम शुरू नहीं हो पा रहा है।

बैंक मालिकों का कहना है कि वह तब तक अपना शुरू नहीं करेंगे, जब तक देश का केंद्रीय बैंक नहीं खुल जाता। दूसरी ओर मुद्रा बदलने वाले बाजार भी बंद पड़े है। वहां काम करने वाले लोगों ने इस स्थिति के लिए देश के केंद्रीय बैंक को जिम्मेदार ठहराया है। देश में बैंकों को बंद हुए करीब दो हफ्ते का वक्त हो गया है, जिसके चलते लाखों लोगों के पास जीवनयापन करने के लिए पैसा नहीं बचा है। नियोक्ता अपने कर्मचारियों को तनख्वा नहीं दे पा रहे और जिन कर्मचारियों के बैंक खाते में पैसे हैं, वो भी बैंक बंद होने के कारण इन्हें निकाल नहीं पा रहे।