ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन(एबीएसयू) ने भाजपा को चेतावनी दी है कि अगर केन्द्र व असम सरकार ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अलग बोडोलैंड के लिए ठोस कदम नहीं उठाए तो वह बोडा समुदाय का समर्थन खो देगी। कोकराझार जिले के उपखंड मुख्यालय गोसईगांव में एक रैली को संबोधित करते हुए ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष प्रमोद बोडो ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले सरकार को अलग बोडोलैंड का निर्माण करना चाहिए अन्यथा  गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।

रैली में हजारों लोग शामिल हुए। उनके हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर लिखा था, जल्द हो अलग
बोडोलैंड राज्य का निर्माण। रैली में आए लोगों ने हमें न्याय चाहिए, हमें बोडोलैंड चाहिए, बोडोलैंड के लिए करो या मरो, नो बोड़ोलैंड, नो रेस्ट जैसे नारे लगाए। पहली बार अलग बोडोलैंड राज्य की मांग ने 2 मार्च 1987 को तेजी पकड़ी। तब ऑल बोडोलैंड स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष बोडोफा उपेन्द्र नाथ ब्रह्मा ने बोडोलैंड डिमांड डे से इसकी शुरू की थी। इसी के साथ असम में बोडोलैंड आंदोलन शुरू हुआ। एबीएसयू के एक सदस्य ने कहा, सरकार अपना वादा करने में विफल रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अलग बोडोलैंड की राज्य की मांग का समर्थन किया।

आपको बता दें कि अलग बोडोलैंड राज्य की मांग 1967 में शुरू हुी थी। 1980 के दशक में बोडो सिक्योरिटी फोर्स के गठन के बाद हिंसक संघर्ष शुरू हुआ। बाद में बोडो सिक्योरिटी फोर्स नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड बना। आपकोबता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को असम की 14 में से सात सीटें मिली थी जबकि कांग्रेस और एआईयूडीएफ के खाते में 3-3 सीटें गई थी। इस बार भाजपा ने पूर्वोत्तर की कुल 25 सीटों में से 21  सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। भाजपा असम की 13 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि एक सीट उसने सहयोगी दल के लिए छोड़ी है। आपको बता दें कि असम गण परिषद ने नागरिकता(संशोधन)विधेयक के विरोध में भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया था।