नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) पर देशभर में बचे बवाल के बीच एनडीए के प्रमुख घटक दल जदयू की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। जदयू के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने शनिवार को कहा कि देशभर में जिस तरह उपद्रव हो रहे हैं, इस अशांति को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री को पहल करनी चाहिए।

वे जनता को विश्वास दिलाएं। कहा कि अशांत छात्र संगठनों के साथ ही प्रधानमंत्री बैठें। एनडीए के घटकदलों की भी बैठक बुलाएं। सबकी राय लेनी चाहिए, आम सहमति बनाने की कोशिश होनी चाहिए। बिहार बंद के लिए विपक्ष को निशाने पर लेते हुए त्यागी ने कहा कि जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कह दिया है कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा, तब ऐसे हिंसक आंदोलन करने की कोई जरूरत नहीं है।

कहा कि राजद का बंद पूरी तरह उसके लालू प्रसाद के ‘जंगलराज’ के नमूने की तरह सामने आया। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा पुलिस को धमकी देना पुराने दिनों को याद कराने सरीखा था। जनता भूली नहीं है कि सत्ता में रहते राजद ने ‘तेल पिलावन, लाठी चलावन’ रैली निकाली थी।

 
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कह चुके हैं कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा। शुक्रवार को पटना में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एनआरसी क्यों लागू होगा? बिल्कुल लागू नहीं होगा। मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि जदयू एनआरसी के पक्ष में नहीं है।
सीएए और एनआरसी को लेकर भाजपा के सहयोगी दल लोजपा ने भी चर्चा की जरूरत जताई है। लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद चिराग पासवान ने भी एक दिन पहले ही ट्विट कर कहा है कि इस मसले पर भाजपा को सहयोगियों से चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने पुराने पत्र को जारी कर कहा है कि इसके लिए उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को पहले भी पत्र लिखा था।

चिराग ने कहा है कि लोकसभा और राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास हो जाने के बाद भी देश में असंतोष बरकरार है। कहा है कि जिस तरह देश में आंदोलन हो रहे हैं उससे साफ है कि इसको लेकर फैले भ्रम को दूर करने में सरकार विफल रही है। उन्होंने एक ट्वीट के माध्यम से मुसलमान और दलित वर्ग को भरोसा दिलाया है कि उनकी चिंता का ख्याल पार्टी रखेगी।