जनसंख्या नियंत्रण पर आज नीति आयोग में बड़ी बैठक का आयोजन होगा। इस बैठक का आयोजन कई कारणों से किया जा रहा है। इसमें जनसंख्या नियंत्रण का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए चर्चा होगी। ज्ञात हो कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने भी जनसंख्या नियंत्रण का जिक्र किया था। जिसके बाद ही जनसंख्या नियंत्रण की नीति को मजबूत करने और परिवार नियोजन के कार्यक्रमों पर चर्चा होगी। इस कंसल्टेशन से निकले सुझावों पर ही नीति आयोग एक वर्किंग पेपर तैयार करेगा, जिसमें जनसंख्या नियंत्रण का एक व्यापक विजन होगा।

सिक्किम में सबसे कम प्रजनन दर

जनसंख्‍या नियंत्रण कानून को लेकर देश भर में अब एक नई बहस शुरू हो गई। पीएम मोदी भी इसे आवश्‍यक बता चुके हैं। सबसे पहले बात करते हैं आंकड़ों की तो नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के 2015-16 के आंकड़ों को देखें तो जनसंख्या प्रति महिला 2.2 के करीब आ चुकी है।  2005-06 में यह 2.7 थी. यानी पहले की तुलना में अब प्रजनन दर में गिरावट आयी हैं।  शहरी औरतों में यह दर 1.8 बच्‍चा प्रति महिला है जबकि ग्रामीण महिलाओं में 2.4. प्रजनन दर सिक्किम में सबसे कम 1.2 जबकि बिहार में सबसे ज्यादा 3.4 है।  यानी बिना किसी कानून के ही शहरों में जनसंख्‍या नियंत्रण चल रहा है, इसकी वजह चाहे स्‍कूलों की फीस हो या कोई और पर 2 चाइल्‍ड पॉलिसी यहां तो कामयाब होने से रहा।

धर्म के अनुसार आंकड़े

अगर धर्मों के अनुसार ये आंकड़े देखें तो हिंदुओं में प्रजनन दर 2.1 है और मुस्लिमों में 2.6. अगर 1992-93 में प्रति महिला 3.8 बच्चों का औसत था। यानी करीब 30 सालों में ये संख्या करीब 1.4 कम हुई है। अच्‍छी बात ये है कि हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों में बच्चे पैदा करने की संख्या का अंतर घटा है। यानी दोनों ही समुदायों ने जनसंख्या नियंत्रण करने में अपना योगदान दिया है। 1992-93 में ये अंतर सबसे अधिक 33.6 फीसदी था, जो करीब 30 वर्षों में 23.8 फीसदी हो गया है।

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