कोरोना महामारी और लॉकडाउन की वजह से सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आत्मनिर्भर भारत पैकेज की पांचवीं किस्त का रविवार ऐलान किया। 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज से जुड़ीं अंतिम चरण की घोषणाएं करते हुए उन्होंने लैंड, लेबर, लिक्विडिटी और लॉ पर जोर दिया। उन्होंने आज सात कदमों की घोषणा की, जिसमें मनरेगा, हेल्थ एंड एजुकेशन, बिजनस, कंपनी ऐक्ट को गैर आपराधिक बनाना, ईज ऑफ डूइंग बिजनस, पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज, राज्य सरकारें और उन्हें दिए गए रिसोर्सेज शामिल हैं।

सीतारमण ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हेल्थ सेक्टर में 15 हजार करोड़ रुपए में से 4113 करोड़ रुपए राज्यों को दिए गए, 3750 करोड़ के जरूरी उपकरण खरीदे गए। हर हेल्थ प्रोफेशनल के लिए 50 लाख रुपए के इंश्योरेंस का प्रावधान किया गया। इसी के साथ एपिडेमिक एक्ट में बदलाव कर हेल्थ वर्कर्स को सहायता पहुंचाई गई। उन्होंने बताया कि आज देश में तीन सौ से ज्यादा मैन्युफैचरर्स पीपीई किट्स बना रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि इस आत्मनिर्भर भारत पैकेज की शुरुआत गरीब कल्याण योजना के साथ की गई थी। गरीबों को मुफ्त राशन देने की व्यवस्था की गई। पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत खाते में कैश डाले गए। पीएम किसान निधि के तहत 8.19 करोड़ किसानों को मदद दी गई। वुद्ध और अन्य लोगों को पेंशन दी गई। जनधन खाता धारक 20 करोड़ महिलाओं के खाते में 10,025 करोड़ रुपए डाले गए। निर्माण कार्य से जुड़े मजदूरों को 3950 करोड़ रुपए से अधिक की मदद दी गई। 2.2 करोड़ लोगों को इसका फायदा हुआ। सभी के खाते में पैसे गए, यह डीबीटी की वजह से संभव है। 6.81 करोड़ सिलेंडर लाभार्थियों को मुफ्त में दिए गए। 12 लाख से अधिक ईपीएफओ खाताधारकों ने पैसे निकाले हैं।

मजदूरों को ट्रेनों से ले जाने का 85 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार ने वहन किया, 15 फीसदी खर्च राज्य सरकारों ने किया। ट्रेनों में उन्हें खाना भी उपलब्ध कराया गया। कोरोना के बाद व्यापार को लेकर तनावग्रस्त स्थिति होगी। इसलिए हमने कई ऐलान किए हैं। बता दें पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से घोषित 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार से आर्थिक पैकेज की बारीकियों को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समझा रही हैं और बड़े सुधारों की घोषणाएं कर रही हैं। इससे पहले वित्त मंत्री ने शनिवार को चौथी किस्त की घोषणा की थी, जिसमें कोयला, रक्षा विनिर्माण, विमानन, अंतरिक्ष, बिजली वितरण आदि क्षेत्रों में नीतिगत सुधारों पर जोर रहा।