निर्भया दोषियों का कोरोना वायरस को लेकर फांसी टालने का आखिरी दांव भी फेल हो गया है। अब कल सुबह जल्दी ही चारों दोषियों को फांसी दी जानी है जिसके बारे में जानने को हर कोई उत्सुक है। लेकिन क्या आपको पता है कि दोषियों का फांसी से ठीक 24 घंटे पहले का समय कैसे गुजरता है। जी हां, यही वो समय होता है कि जब दोषी एक ऐसी जिंदगी जीता है ​जिसके बारे में जानकर किसी की भी रूह कांप सकती है। 

फांसी से ठीक पहले के कुछ समय में कुछ दोषी गाना गाते हैं, कुछ पेटभर मनपसंद खाना खाते हैं और चैन से सोते हैं, वहीं कुछ लोग खुद को बेगुनाह बताते हुए चीखते-चिल्लाते हैं और रोते हैं। बताया जाता है कि कई दोषी तो फांसी से पहले ठीक से खाना तक नहीं खा पाते और थर थर कांपते रहते हैं तथा फंदे पर लटकने से ठीक पहले तक रहम की भीख मांगते रहते हैं।

आपको बता दें कि फांसी की सजा पा चुके दोषियों को फांसी वाले दिन से ठीक 7 दिन पहले इसकी सूचना दे दी जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि वो अपने परिवार और दोस्तों से बात कर सकें और अपनी वसीयत बना सकें। यह जानकारी जेल सुपरिंटेंडेंट को देनी होती है।

कई दोषी तो फांसी की खबर सुनकर भी खुशमिजाज रहते हैं जबकि कई जोर जोर से रोते हुए अपना आरोप दूसरों पर लगाने का भरसक प्रयास करते हैं। फांसी से पहले कैदियों को डेथ सेल में डाल दिया दिया जाता है। उनकी सारी चीजें ले ली जाती हैं। फांसी की चीजें तैयार करने के लिए कैदियों का वजन, कद और गर्दन नापी जाती है। कैदी जितना वजनदार होगा, उसे उतना ही कम गिरना होता है। इस प्रक्रिया को पूरा करना बहुत जरूरी होता है, वरना गर्दन टूटने का डर रहता है।

बताया जाता है कि जिस कैदी को फांसी देनी होती है उसकी नकल के लिए दोषी के वजन से डेढ़ गुना भार के रेत के बोरे को लटकाया जाता है, ताकि पता चल सके कि रस्सी मजबूत है या नहीं। क्योंकि फांसी के समय रस्सी टूट न जाए, इसलिए उस पर बटर या मोम लगाया जाता है। हालांकि कुछ जल्लाद साबुन और मसले हुए केले लगाना पसंद करते हैं।

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