दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्भया के दोषी मुकेश की याचिका खारिज कर दी है। निर्भया के दोषी मुकेश ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए अपनी फांसी की सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। पटियाला हाउस कोर्ट में गुरुवार की दोपहर 12 बजे सुनवाई होनी है।

वहीं दूसरी ओर पवन जल्लाद ने बताया कि फांसी घर में फांसी से पहले इशारों में क्या बात की जाती है और उसके बाद कैसे फांसी के फंदे पर पहुंचाया जाता है। पवन का कहना है कि फांसी की तारीख तय होते ही हमें जेल में बुलाया जाता है। फांसी देने के पहले यह सब प्लान किया जाता है कि कैदी के पैर कैसे बांधने हैं, रस्सी कैसी बांधनी हैं।


फांसी देने की प्रक्रि‍या के बारे में पवन जल्लाद ने बताया कि जो समय तय होता है, उससे 15 म‍िनट पहले फांसी घर के ल‍िए चल देते हैं। हम उस समय तक तैयार रहते हैं। फांसी की तैयारी करने में भी एक से डेढ़ घंटा लगता है।

कैदी के बैरक से फांसी घर में आने की प्रक्र‍िया पर उन्होंने बताया था कि फांसी घर लाने से पहले कैदी के हाथ में हथकड़ी डाल दी जाती है, नहीं तो हाथों को पीछे कर रस्सी से बांध द‍िया जाता है। बैरक से फांसी घर की दूरी के आधार पर फांसी के तय समय से पहले उसे लाना शुरू कर देते हैं।
फांसी घर के बारे में बात करते हुए पवन कहते हैं कि फांसी देते समय 4-5 स‍िपाही होते हैं, वह कैदी को फांसी के तख्ते पर खड़ा करते हैं। वह कुछ भी बोलते नहीं हैं, केवल इशारों से काम होता है। इसके ल‍िए एक द‍िन पहले हम सब की जेल अधीक्षक के साथ एक मीटिंग होती है। इसके अलावा फांसी घर में जेल अधीक्षक, ड‍िप्टी जेलर और डॉक्टर भी वहां मौजूद रहते हैं।फांसी देते समय वहां मौजूद लोग कुछ भी बोलते नहीं हैं, स‍िर्फ इशारों से काम होता है। इसकी वजह बताते हुए पवन कहते हैं कि इसकी वजह है क‍ि कैदी कहीं ड‍िस्टर्ब न हो जाए, या फ‍िर वह कोई ड्रामा न कर दे। इसील‍िए सभी को सब कुछ पता होता है लेक‍िन कोई भी कुछ बोलता नहीं है।

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