कोरोना संक्रमित व्यक्ति जिन्हें स्वाद और गंध का एहसास नहीं हो रहा है उनके लिए यह राहत भरी खबर है, ऐसे मरीज गंभीर होने के खतरे से दूर हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में 220 मरीजों पर हुए रिसर्च में यह खुलासा हुआ है। रिसर्च के लिए दो कैटेगरी बनाई गई है। इसमें एक कैटेगरी में उन मरीजों को लिया गया है जिन्हें स्वाद और गंध नहीं मिल रही थी। दूसरे एक कैटेगरी उन मरीजों की थी जिन्हें स्वाद और गंध मिल रही थी।

इन दोनों में तुलानात्मक अध्ययन किया गया तो पता चला स्वाद और गंध नहीं पाने वाले कुल नौ मरीज भर्ती हुए और जिन्हें स्वाद और गंध मिल रही थी उनमें 34 लोग अस्पताल में भर्ती हो गए। इनमें आठ लोगों की मौत भी हो गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि रिसर्च में यह देखा जाना था कि कोरोना वायरस का हमला स्वाद और गंध पर किस तरह डालता है। मरीज किस हद तक गम्भीर होते हैं। 

स्वाद और गंध नहीं पाने वाले अधिकतर मरीजों को सामान्य दवाओं और होम आइसोलेशन पर रखा गया।  पाया गया कि 10 से 15 दिन के अंदर वह कोरोना निगेटिव हो गए। हालांकि स्वाद और गंध नहीं मिलने की शिकायत कुछ को महीने भर तो किसी में डेढ़ महीने बनी रही। जांच में पता चला कि नाक में पाए जाने वाले ओलिफेक्टिटरी ग्रंथि पर कोरोना का जबरदस्त हमला हुआ। कोरोना वायरस यही ठहरा रहा और न वह ब्रेन की ओर जा सका और न ही फेफड़े में उतर सका। ऐसे में ब्रेन और श्वसन तंत्र सुरक्षित रहे। मरीज एक्यूट आर्गन फेल्योर से बचे रहे।