इटली का पहला कोरोना वायरस मरीज जनवरी के आखिरी में वुहान से इटली गया था। जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। हाल ही प्रकाशित रिपोर्ट में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि उसके नाक से कोरोना वायरस निकल जाने के कुछ दिन बाद उसकी आंखों में वायरस मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति की आंखों के तरल हिस्से में बना रह सकता है। इसीलिए हाथों को बार-बार धोने और हाथों को चेहरे या आंखों को नहीं छूने की हिदायत दी जाती है।

65 वर्षीय एक महिला, वायरस का पहला एपीसेंटर छोडऩे के बाद 23 जनवरी को इटली पहुंची थी। सूखी खांसी, गले में खराश, नाक बहने और आंख लाल होने के बाद 29 जनवरी तक उसे एक अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया। इसके बाद वह पॉजिटिव मिली। 21 दिन अस्पताल में रखने के बाद इसका पता नहीं चला, लेकिन 27 दिन बाद फिर जब जांच हुई तो आंख में वायरस होने का संकेत मिला। संक्रामक सोसायटी ऑफ अमरीका के प्रवक्ता एरॉन ग्लैट का ने बताया कि वुहान में यह सामने आया था कि यह आंख के जरिए भी फैल सकता है। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड हार्डी का कहना है कि नाक और आंख ड्रेनेज सिस्टम के रूप में काम करते हैं, जहां वायरस उल्टी यात्रा भी कर सकते हैं। यानी पलट सकते हैं।

हार्डी ने बताया कि कोशिकाएं वायरस की पसंदीदा जगह होती हैं, जो गले से फेफड़ों तक जाती हैं। इसी जगह पर वायरस सर्वाधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। आंख की कोशिकाएं एक जैसी लगती हैं, लेकिन समान नहीं हैं। जब वायरस इनमें प्रवेश करता है, तो यह उतना ही विनाश का कारण बनता है, जितना श्वसन प्रणाली की कोशिकाओं में। हार्डी ने बताया कि इसके लिए सारी जरूरी सावधानी बरतें। जब तक आप घर न जाएं चेहरा न धोएं। पहले हाथों को अच्छे से धोएं और उसके बाद ही चेहरा धोएं।\