भारतीय रेल ने त्रिपुरा में 3407 करोड़ रुपए की लागत से राजधानी अगरतला से दक्षिण त्रिपुरा के शहर सबरूम के बीच 114.6 किलोमीटर की नई रेल लाइन शुरू की है। यह रेल लाइन त्रिपुरा के कुल 8 जिलों में से 4 से होकर गुजरती है। त्रिपुरा राज्य के आर्थिक विकास के लिए सबरूम से अगरतला की कनेक्टिविटी बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही बांग्लादेश के सबसे बड़े पोर्ट चटगांव के सीधे रेल रुट की कनेक्टिविटी पूरे नॉर्थ ईस्ट में ट्रेड और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने में एक बड़ा कदम होगा। मौजूदा समय में पूरे उत्तरपूर्व राज्यों के लिए जरूरी सामान खाद्यान से लेकर तेल, खाद से लेकर सीमेंट और कोल जैसे भारी सामान की आपूर्ति पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट से पश्चिम बंगाल को पार करते हुए असम होते हुए अलग-अलग राज्यों में आपूर्ति होती है।

बता दें कि पूर्वोत्तर राज्यों में कोई पोर्ट और रेल कनेक्टिविटी नहीं होने की वजह से सामान ढुलाई देश के दूसरे हिस्सों के तुलना में काफी महंगा पड़ता हैं। वहीं, इन राज्यों में होने वाली फल सब्जियों और बम्बू और केन ट्री के उत्पादों को एक्सपोर्ट करना भी घाटे का सौदा होता हैं, क्योंकि हजारों किमी लंबे रूट यात्रा कर आने जाने वाला माल न केवल देर से पहुंचता हैं, बल्कि कॉस्टिंग के लिहाज से महंगा हो जाता हैं। साथ में बार बार लोडिंग अनलोडिंग की वजह से डैमेज भी होता हैं।


अब त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से सबरूम रेल रुट के सहारे बांग्लादेश के चटगांव पोर्ट के माध्यम से सामान आसानी से पूरे पूर्वोत्तर में आवाजाही कर सकता हैं, वही रेल रुट की वजह से देश के दूसरे हिस्सों से आल वेदर कनेक्टिविटी से नॉर्थ ईस्ट स्टेट में न केवल सप्लाई चेन सस्ता और टिकाऊ होगा, बल्कि वहां से सामान को एक्सपोर्ट से साथ-साथ देश के बड़े बाजारों में आसानी से पहुंचाया जा सकता हैं। रेलवे पूर्वोत्तर के सभी राज्यों की राजधानी और बड़े शहरों को रेलनेटवर्क में जोड़ने का काम हो रहा हैं। उसी क्रम में अगरतला से सबरूम के बीच नई लाइन के निर्माण का काम पूरा हो गया है। सबरूम तक रेल सेवा शुरू होने के बाद सभी पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश को बड़ा फायदा होगा। बांग्लादेश के चटगांव पोर्ट से सबरूम की दूरी महज़ 70 किमी है।


ये रेलवे लाइन त्रिपुरा के 4 ज़िलों पश्चिमी त्रिपुरा, सेपहिजाला, गोमती और दक्षिणी त्रिपुरा के 12 स्टेशनों से होकर गुज़रती है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर रेलवे ने करीब 3400 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसे मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। चटगांव बंदरगाह तक पहुंचने के लिए बंग्लादेश तेज़ी से सड़क निर्माण का काम कर रहा है। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक बांग्लादेश में यह काम पूरा हो जाएगा। अगरतल्ला से चटगांव बंदरगाह पहुंचने के लिए मुश्किल सड़कों पर करीब 200 किलोमीटर तक सफर करना होता है।


त्रिपुरा, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, अरुणाचल और असम को चटगांव पोर्ट से करीबी की वजह से बड़ा फायदा मिलने वाला है। इन इलाकों तक सामान पहुंचाने या यहां से बाहर ले जाना अब काफी सस्ता सौदा होगा साथ ही इसमें समय की भी बचत होगी। इससे भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार को काफी बढ़ावा मिलेगा, सबरूम रेल लाइन पर ही उदयपुर में त्रिपुर सुंदरी देवी का मंदिर है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है और बांग्लादेश के हिन्दुओं के बीच भी इस मंदिर की काफी मान्यता है, ज़ाहिर है नई लाइन के निर्माण से बांग्लादेश के लाखों श्रद्धालुओं को भी इसका फायदा मिलेगा।