दक्षिणी अमेरिकी देश चिली अपने खूबसूरत पहाड़ों के लिए जाना जाता है। यहां 22 पहाड़ ऐसे हैं जो 20 हजार फीट से ऊंचे हैं। लेकिन यहां मौजूद दुनिया के सबसे सूखे रेगिस्तान अटाकामा में इस समय एक ऐसा पहाड़ बना हुआ है, जो बाकी से अलग है। इस रेगिस्तान में छोड़े गए कपड़ों का पहाड़ है। यहां पर हर चीज मौजूद है क्रिसमस के स्वेटर्स से लेकर स्की बूट्स तक। लेकिन समस्या ये है कि यह एक नए तरह का प्रदूषण फैला रहा है। नए तरह का कचरा पैदा हो रहा है। जो लगातार बढ़ता जा रहा है।

चिली (Chile) सेकेंड हैंड और न बिकने वाले कपड़ों का लंबे समय से गढ़ रहा है। यहां पर चीन (China) और बांग्लादेश (Bangladesh) में बनने वाले कपड़े यूरोप, एशिया और अमेरिका के रास्ते उपयोग होते हुए पहुंचते हैं। लैटिन अमेरिका यानी चिली और उसके आसपास के देशों में ये कपड़े बिकते हैं। चिली में हर साल 59,000,000 किलोग्राम कपड़े आते हैं। ये कपड़े उत्तरी चिली के अल्टो हॉसपिसियो फ्री जोन के इबीक्यू पोर्ट पर उतरते हैं। जिन्हें स्थानीय कपड़ा व्यवसायी खरीदते हैं। इन कपड़ों की स्मगलिंग भी होती है।

हर साल आने वाले कपड़ों में से सारा तो उपयोग होता नहीं है। हर साल अटाकामा रेगिस्तान में करीब 39,000,000 किलोग्राम कपड़े बच जाते हैं। जो लगातार पहाड़ का रूप लेते जा रहे हैं। इसकी बड़ी दिक्कत ये है कि लोग बहुत जल्दी अपने कपड़े बदलते हैं। जिसे आजकल फास्ट फैशन क्लोदिंग (Fast Fashion Clothing) कहा जाता है। लेकिन छोड़े हुए कपड़ों की वजह से फैल रहे कचरे और प्रदूषण की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता।

फास्ट फैशन क्लोदिंग (Fast Fashion Clothing) की वजह से छोड़े गए कपड़ों के रेशों और रंगों से रसायन निकलते हैं, जो पर्यावरण को खराब करते हैं। एक कपड़ा चाहे वह किसी भी प्रकार का क्यों न हो उसे खत्म होने में 200 साल लग जाते हैं। लेकिन अटाकामा रेगिस्तान के अल्टो हॉसपिसियो में कपड़े का यह पहाड़ तेजी से बढ़ता जा रहा है. जिसकी तरफ अंतरराष्ट्रीय संगठनों का ध्यान नहीं जा रहा है।

कपड़ें के इन पहाड़ों की वजह से आसपास के इलाकों में सामाजिक-आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। तेजी से बढ़ते फास्ट फैशन क्लोदिंग (Fast Fashion Clothing) की वजह से बच्चे और महिलाएं यहां के कपड़ों की दुकानों में काम करती हैं। कई तो पहाड़ों में जाकर काम लायक कपड़ों को खोजने का काम भी करती हैं। बेहद कम पैसे में लोगों को कपड़ा उद्योग में लगाया जाता है। इससे यहां के लोगों की रोजी-रोटी तो चल जाती है, लेकिन पर्यावरण की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

बहुत से लोग खुद-ब-खुद इन कपड़ों के पहाड़ों में जाकर अपने और परिवार के लिए कपड़ों की खोज करते हैं। उन्हें कई बार कपड़े मुफ्त में मिल जाते हैं, कई बार बेहद कम कीमत पर। लेकिन कई स्थानीय इन कपड़ों में से बेहतर कपड़े छांटकर अपनी छोटी सी दुकान खोलकर वहां बेचते हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को कम कीमत में कपड़े मिल जाते हैं। स्थानीय लोगों का रोजगार चलता रहता है।

साल 2019 में आई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर कपड़े का उत्पादन साल 2000 से 2014 के बीच दोगुनी हो गई है। दुनिया भर में होने वाले पूरे जल प्रदूषण का 20 फीसदी हिस्सा कपड़ा उद्योग का होता है। हालांकि, एक अच्छी बात ये है कि हर कपड़ा कचरा नहीं बनता। न ही प्रदूषण फैलाता है। इस इलाके में रहने वाले 3 लाख लोग ज्यादातर इन पहाड़ों से कपड़ों को निकालकर अपना रोजगार चलाते हैं।